कश्मीर नहीं, PoK वापस पाना है मुद्दा – जितेन्द्र सिंह

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की ‘बड़ी चूक’ को कश्मीर समस्या का प्रमुख कारण बताते हुये आज कहा कि वहाँ यदि कोई समस्या है तो वह पाकिस्तान के कब्जे में ‘अवैध रूप से’ कश्मीर के हिस्से को वापस पाने की है।

जितेन्द्र सिंह ने यहाँ एक निजी अंग्रेजी टेलीविजन चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा ‘सबसे पहले हमें इस कहानी को बदलना है कि‘कश्मीर कोई मुद्दा है’ उन्होंने कहा कि यह कोई मुद्दा नहीं है। यदि कोई मुद्दा है तो वह पिछले 70 साल से अवैध रूप से पाकिस्तान के कब्जे में मौजूद कश्मीर के हिस्से को वापस पाने का है – उसी स्वरूप में जिसे तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने सौंपा था।’

उन्होंने कहा कि दूसरा मुद्दा कश्मीर की मूल संस्कृति और और आबादी के अनुपात को पुरानी स्थिति के अनुरूप बहाल करने का है और इसके लिए वहाँ कश्मीरी पंडितों को वापस बसाया जाना चाहिये।
कश्मीर समस्या के लिए‘बड़ चूकों की एक श्रृंखला’को जिम्मेदार बताते हुये जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सबसे पहली चूक देश को हिस्सों में बाँटने की थी। बाद में पाकिस्तान के बँटवारे के साथ ही‘दो राष्ट्र का सिद्धांत’अपने-आप गलत साबित हो गया। पाकिस्तान आज तक यह स्वीकार नहीं कर पा रहा है कि कश्मीर भारत का अंग है।

उन्होंने कहा कि बँटवारे के बाद पं. नेहरू ने दूसरी ‘बड़ी चूक’ की थी और पहले तो उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल को कश्मीर मामले में अन्य राज्यों की तरह कार्यवाही करने से रोका। बाद में जब पाकिस्तान के हमले का संकट आ गया तो उन्होंने सरदार पटेल को कश्मीर मामले में दखल देने दिया जिसके बाद कश्मीर भारत का हिस्सा बना। लेकिन, बीच में ही युद्ध विराम की घोषणा कर उन्होंने‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’बनने दिया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान में पं। नेहरू ने जनमत संग्रह की बात कहकर एक और गलती की।

जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के विभाजन के बाद 1972 में शिमला समझौते के समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के पास भी अच्छा मौका था जिसे हमने गँवा दिया। उन्होंने कहा ‘अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं और अलगवादी पूरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं।‘

आजादी’का मॉडल एक फेक मॉडल है जिसमें पड़सी के बच्चों को जेहादी बनाते हैं और अपने बच्चों को सुरक्षित जगहों पर भेजते हैं।’ उन्होंने मुख्य धारा के कुछ राजनीतिक दलों पर भी राजनीति का मुखौटा लगाकर अलगाववाद को बढ़वा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह अवसरवादी अलगाववाद खुले अलगाववाद से ज्यादा खतरनाक है।

बिना किसी देश का नाम लिये केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुश्मन पक्ष जिनके बारे में हम सबको पता है, कश्मीर में आतंकवाद को वित्तीय मदद दे रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर नीतियों में दृढ़ निश्चय, निरंतरता और स्पष्टता का श्रेय मोदी सरकार ले सकती है।