कश्मीर में मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया आर्थिक सहयोग और श्रमदान

दिल में अगर प्रेम और आपसी भाईचारे का भाव हो तो जाति-धर्म आड़े नहीं आता है। ऐसे ही भाईचारे और संप्रदायिक सद्भाव की मिसाल कश्मीर के त्राल में स्थिति हरिपारीगम गांव में कायम हुई है। कश्मीर में सबसे अधिक आतंक प्रभावित क्षेत्र त्राल के इस गांव में कश्मीरी पंडितों द्वारा किए जा रहे मंदिर के पुनर्निर्माण में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने श्रमदान और आर्थिक दान कर भाईचारे की नजीर पेश की।

पुलवामा जिले के त्राल टाउनशिप के हरिपारगम गांव में एक दशक पूर्व मंदिर की स्थापना की गई थी। काफी समय से मंदिर के पुनर्निर्माण नहीं होने के बाद गांव में कश्मीरी पंडित और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मंदिर का पुनर्निर्माण करने का फैसला लिया। पुनर्निर्माण में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आर्थिक मदद मुहैया करवाई और साथ में निर्माण कार्य में श्रमदान के साथ अपना सहयोग दिया। गांव के स्थानीय कश्मीरी पंडित माखन लाल ने कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण में मुस्लिम भाइयों ने पूरा सहयोग दिया।

निर्माण होने वाले आर्थिक खर्च से लेकर निर्माण की चर्चा में सक्रिय भाग लिया। मंदिर के पुनर्निर्माण के शामिल रमेश भट्ट ने कहा कि सच्चे कश्मीर की सच्ची तस्वीर उनके हरिपारगम गांव में दिखती है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे की संस्कृति और रीति रिवाज का सम्मान करते हैं। मंदिर के पुनर्निर्माण में शामिल फारूख अहमद ने बताया कि पंडित हमारे भाई हैं। हम वर्षों से इस गांव में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही कश्मीर की छवि बाहर कैसी दिखाई जाती है, परंतु हम भाईचारे और संप्रदायिक सद्भाव के साथ रहते आ रहे हैं।