केंद्र सरकार परेशान, अबतक 164 कश्मीरी युवा आतंकी संगठन में हो चुके हैं शामिल

केंद्र सरकार के लिए घाटी से एक बुरी खबर आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को बताया है कि इस साल 26 अक्तूबर तक जम्मू-कश्मीर के 164 युवा आतंकी संगठन में शामिल हो चुके हैं। यह संख्या पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। यह परेशानी का सबब इसलिए भी है क्योंकि सर्दियों के मौसम में युवाओं के आतंकी संगठन में जाने की संख्या में इजाफा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस साल के अंत तक यह संख्या 200 तक पहुंच सकती है।
घाटी में इस समय पहले से ही 350-400 आतंकी सक्रिय हैं। 2015 में केवल 66 युवाओं ने आतंकी संगठन का हाथ थामा था। यह संख्या 2016 में थोड़ी सी बढ़ी, उस साल 86 युवाओं ने बंदूक उठाई थी। वहीं पिछले साल लगभग 120 युवा आतंकी बने। इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस साल फरवरी और मार्च में केवल 3 और 7 स्थानीय नागरिक आतंकी संगठन में शामिल हुए थे लेकिन यह संख्या अचानक से जून, जुलाई और अगस्त में बढ़ने लगी।’

सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि अकेले अगस्त में 25 युवा आतंकी संगठन जैसे कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हुए। यह संख्या जून और जुलाई में 24 और 25 रही। एजेंसियों के अनुसार बहावलपुर बेस्ड जैश ने सबसे ज्यादा स्थानीय नागरिकों को शामिल किया है। 60 से ज्यादा नागरिक जनवरी 2018 से अब तक जैश में शामिल हुए हैं। आंतकी संगठन में शामिल होने वाले ज्यादातर युवा अनंतनाग, शोपियां और पुलवामा जिले से हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि 164 भर्तियों में से अकेले 50 नागरिक पुलवामा और 30 शोपियां जिले से हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने के बहुत से कारण हैं। धारा 35ए पर बहस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन टूटने से राज्य में और तनाव को बढ़ाने का काम किया है।’ वहीं सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन में बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया है। एजेंसी ने कहा कि 26 अक्तूबर, 2018 तक मारे गए आतंकियों की संख्या 180 हो चुकी है। वहीं पिछले साल 210 आतंकियों को मारा गया था।