LG मुर्मू का बड़ा खुलासा, ‘विषम परिस्थितियों में लिया गया था अनुच्छेद 370 रद्द करने का फैसला

केंद्र सरकार की ओर से पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को दिए गए विशेष प्रावधान को रद्द करने के फैसले को एक साल पूरे होने वाला है। ऐसे में जम्मू और कश्मीर के पहले उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने का फैसला अत्यधिक विषम परिस्थितियों में लिया गया था।

हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ से एक विशेष साक्षात्कार में जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर (जम्मू-कश्मीर) में पिछले साल जबरदस्त विकास हुआ है। कुछ लोग यहां 70 साल में पहली बार बिजली देख रहे हैं। जम्मू और कश्मीर के लोगों की भागीदारी पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि लोगों की अभूतपूर्व भागीदारी के साथ केंद्र शासित प्रदेश में कई बदलाव हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन ने युवा-उन्मुख कार्यक्रमों के साथ क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है।

जम्मू और कश्मीर में अब सामान्य स्थिति
पिछले साल 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने तत्कालीन राज्य की विशेष स्थिति को समाप्त कर दिया था और दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू और कश्मीर में बांटने की घोषणा कर दी थी। केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए मुर्मू ने कहा कि लोगों का मूड उत्साहित है और Covid-19 महामारी के कारण केवल कुछ व्यवधान है। जम्मू और कश्मीर में अब सामान्य स्थिति बनी रहती है।

महबूबा की रिहाई पर मुर्मू बोले- लगातार समीक्षा कर रहे हैं
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की रिहाई के बारे में बात करते हुए उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने कहा कि स्थिति का लगातार समीक्षा की जा रही है। उसी के अनुसार ही हम नेताओं की रिहाई पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि नेताओं की रिहाई के लिए निश्चित दिशानिर्देश और प्रावधान हैं। कानून के तहत निर्धारित समय का पालन किया जाएगा। पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मुफ्ती की नजरबंदी शुक्रवार को तीन महीने बढ़ा दी गई। इसके अलावा फारूक अब्दुल्ला सहित मुफ्ती और कश्मीर के कई अन्य नेताओं को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद हिरासत में ले लिया गया था।