भारत-चीन सीमा विवाद: वायुसेना प्रमुख बोले- गलवान के जांबाज़ों की शहादत को बेकार नहीं जाने देंगे

सीमा पर चीन से चल रहे तनाव के बीच वायु सेना प्रमुख आर के एस भदौरिया ने आज देशवासियों को भरोसा दिया कि वायुसेना किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयार है. गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और LAC पर चल रही तनातनी के बारे में उन्होने कहा कि भारत का क्षेत्रीय वातावरण ऐसा है कि वायुसेना को हमेशा तैयार रहने की ज़रूरत है, जिससे शॉर्ट नोटिस पर किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहें.

एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया आज हैदराबाद के करीब डिंडीगुल स्थित एयरफोर्स एकेडमी में नए कैडेट ऑफिसर्स को संबोधित कर रहे थे. शनिवार को वायुसेना की कम्बाइेंड ग्रेजुऐशन परेड थी, जिसमें नए अधिकारी एयरफोर्स में शामिल हुए थे.

गलवान के जांबाज़ों की शहादत को बेकार नहीं जाने देंगे- वायुसेना प्रमुख
वायुसेना प्रमुख ने यहां तक कहा कि सैन्य सहमतियों के बावजूद चीन की अस्वीकार्य कार्रवाई और उसके कारण हुए मानव जीवन नुकसान के बाद भी हम प्रयासरत हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके. लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयार भी हैं और पर्याप्त रूप से तैनात भी हैं.

उन्होनें कहा, “मैं देश को भरोसा दिलाना चाहूँगा कि हम अपनी ज़िम्मीदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम गलवान के जांबाज़ों की शहादत को बेकार नहीं जाने देंगे।”

पिछले डेढ़ महीने से अलर्ट पर है वायु सेना

गौरतलब है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले डेढ़ महीने से चल रही तनातनी के बाद से ही वायुसेना पूरी तरह अलर्ट है. वायु सेना के सभी फ्रंट लाइन एयरबेस हाई अलर्ट पर हैं. लेह, श्रीनगर, आदमपुर, हलवारा, भटिंडा और अंबाला एयरबेस से लगातार वायुसेना के फाइटर जेट्स चीन सीमा पर एयर कॉम्बेट पैट्रोल (सीएपी) कर रहे हैं.

खास तौर से सुखोई, मिग-29 और मिराज लड़ाकू विमान यहां पर लगातार हवाई-गश्त कर रहे हैं. श्रीनगर से लेह लद्दाख और काराकोरम दर्रे तक इन फाइटर जेट्स की गड़गड़ाहट सुनी जा सकती है. इसके अलावा वायुसेना ने हाल ही में अमेरिका से लिए अटैक हेलीकॉप्टर्स अपाचे को भी लद्दाख में तैनात किया है. ये अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर्स दुश्मन देश के न केवल टैंक मूवमेंट पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं बल्कि उंचे पहाडों पर दुश्मन के बंकर और पोस्ट (चौकियों) को तबाह करने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं. चीन सीमा की निगहबानी के लिए नौसेना के पी8आई टोही विमान भी चीन सीमा पर तैनात कर दिए गए हैं। वायुसेना के टोही विमान अवैक्स (एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम) भी लगातार आसमान में नज़र बनाए हुए हैं, जिससे चीन के फाइटर जेट्स की मूवमेंट्स पर नज़र बनाई रखी जा सके.

जानकारी के मुताबिक, चीन भी लद्दाख और हिमाचल प्रदेश से सटी भारत की एयर स्पेस पर अपने फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर उड़ा रहा है. हाल ही में LAC से सटे तिब्बत के नगरी-गुंसा एयरपोर्ट को चीन ने एयरबेस में तब्दील कर दिया है. वहां चीन के फाइटर जेट्स बड़ी तादाद में देखे जा सकते हैं.

चीन के पास तीन और भारत के पास दो हज़ार लड़ाकू विमान हैं

चीन की वेस्टर्न थियेटर कमांड पूरी भारत सीमा को देखती है. दरअसल, ये एक ज्वाइंट कमांड है जिसमें थलसेना (पीएलए-ग्राउंड फोर्सेज़) और वायुसेना यानि पीएलए-एयरफोर्स एक साथ काम करती हैं. भारत से सटे चीन के मुख्य एयरबेस, तिब्बत की राजधानी ल्हासा, नगरी-गुंसा, कासगर, निंगचीं, शैनान इत्यादि हैं. यहां पर चीन के जे-20, जे-11 और सुखोई तैनात रहते हैं. चीन के पास करीब तीन हजार फाइटर जेट्स हैं जबकि भारत के पास दो हजार लड़ाकू विमान हैं. जल्द ही भारत के जंगी बेड़े में रफाल लड़ाकू विमान भी जुड़नें वाले हैं जो एशिया में गेम-चेंजर का काम करेंगे.

चीन का हवा में मात देने के लिए चीन की एयर स्पेस की निगहबानी भारतीय वायुसेना की तीन अलग अलग कमान के पास है. लेह-लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लिए पश्चिमी कमान, उत्तराखंड के लिए सेंटर्ल कमांड और सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश के लिए पूर्वी कमान.