चीन की चालबाजियों को देखते हुए भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर ‘गैप’ भरने में जुटी

पूर्वी लद्दाख से सटी करीब 826 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुयल कंट्रोल यानि एलएसी पर अब भारतीय सेना पूरी तरह से कड़ी निगरानी रख रही है. एलएसी पर किसी भी गैप यानि खाली इलाके या फिर पहाड़ी पर लगातार पैट्रोलिंग चल रही है. भारतीय सेना को इस बात का अंदेशा है कि अगर किसी भी इलाके पर जरा सी भी जगह छोड़ी गई तो चीनी सेना उस इलाके पर अपना कब्जा कर सकती है.

भारतीय सेना की चौकास निगरानी का ही नतीजा था कि 29-30 अगस्त की रात को भारतीय सेना ने चीनी सेना की पैंगोंग-त्सो लेक के दक्षिण में ब्लैक-टॉप और हैलमेट पहाड़ी पर चीनी सेना से पहले जाकर अपने अधिकार में कर लिया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की सीक्रेट रेजीमेंट, स्पेशल फ्रंटियर फोर्स और दूसरी पलटन ने हिस्सा लिया था.

जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना उन सभी इलाकों में अब पैट्रोलिंग यानि गश्त कर रही है जहां 1962 का युद्ध भी हुआ था. ये वे इलाके हैं जिन्हें भारत और चीन ने ‘62 के युद्ध के बाद से ही खाली छोड़ रखा था. लेकिन मई के महीने से जिस तरह चीनी सेना ने पहले फिंगर एरिया, फिर गोगरा, हॉट-स्प्रिंग, डेपसांग प्लेन्स और कुंगरंग नाले के आस-पास घुसपैठ की, उससे देखते हुए ही भारतीय सेना अब पूरी एलएसी पर चौकसी बरत रही है.

पैट्रोलिंग के दौरान ही हाल ही में एसएफएफ के एक अफसर की ‘62 के युद्ध की एक लैंडमाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी. एसएफएफ का एक अन्य जवान भी इस घटना में घायल हो गया था.

भारतीय सेना के इफेंट्री सैनिकों के अलावा बीएमपी-व्हीक्लस के साथ मैकेनाइजड-इंफेंट्री, और टैंकों के साथ आर्मर्ड ब्रिगेड भी तैनात की गई है. टेक्टिकल-पोजिशन्स पर तोप और मीडियम रेजीमेंट गन्स को भी तैनात किया गया है.

लेकिन चीनी सेना अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रही है. मंगलवार को खबर आई कि चीनी सेना ने चुमार इलाके में बख्तरबंद गाड़ियों को एलएसी के करीब लाने की कोशिश की. लेकिन भारतीय सेना बाद में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वो चीन का ही इलाका है, और चीन ने शांतिपूर्ण तरीके से ये कारवाई की थी. ये किसी तरह की घुसपैठ नहीं थी.

एलएसी पर चल रही तनातनी को लेकर मंगलवार को भी साउथ ब्लॉक रक्षा मंत्रालय में बैठकों का दौर जारी रहा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए अजीत डोवाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत सहित सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से करीब दो घंटे लंबी बैठक की.

इस बैठक में एलएसी के हालात को लेकर तो चर्चा हुई ही साथ ही बुधवार से रक्षा मंत्री की रूस की तीन दिन (3-5 सितबंर) की यात्रा के बारे में भी बातचीत हुई. रक्षा मंत्री एसएसीओ देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए मास्को जा रहे हैं. एससीओ में भारत सहित रूस, चीन और पाकिस्तान सहित कुल आठ देश सदस्य हैं. राजनाथ सिंह इस दौरे के दौरान रूस के रक्षा मंत्री से दो द्विपक्षीय बातचीत करेंगे लेकिन माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह चीन और पाकिस्तान के रक्षा मंत्रियों से सीधे बातचीत नहीं करेंगे.