जम्मू-कश्मीर में आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को ‘देश विरोधी’ गतिविधि के आरोप में अब बिना जांच के निकाला जा सकता है

जम्मू-कश्मीर में वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों सहित किसी भी सरकारी अधिकारी को अब ‘राष्ट्र विरोधी” गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर बिना किसी जांच के सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है, दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.

जम्मू-कश्मीर सरकार के सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव बीवी आर सुब्रह्मण्यम के तहत एक समिति बनाई गई है जो भारत के ‘अखंडता और सुरक्षा’ के खिलाफ काम करने वाले अधिकारियों के संबंध में सेवा से बर्खास्तगी सहित कार्रवाई की जांच और सिफारिश करने के लिए काम करेगी.

सूत्रों ने बताया कि समिति में जम्मू-कश्मीर के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, सामान्य प्रशासन और कानून और न्याय विभाग के प्रशासनिक सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) शामिल हैं.

पिछले सप्ताह जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा एक आदेश जारी किए जाने के बाद पैनल की स्थापना की गई थी. आदेश, जिसकी एक प्रति दिप्रिंट को मिली थी. यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) का आवाह्न करती है, जो संघ या संघ के तहत नागरिक क्षमताओं में कार्यरत व्यक्तियों को पद से ‘खारिज करने या हटाने’ की अनुमति देता है.

यह अनुच्छेद पहले जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं था, जब संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत उसे विशेष दर्जा प्राप्त था. पूर्ववर्ती राज्य से पिछले वर्ष विशेष दर्जा छीन लिया गया था. लेकिन बिना जांच के सरकारी अधिकारियों को पहले सेवा से हटाया या खारिज किया जा सकता था.

दिप्रिंट ने एक टिप्पणी के लिए कॉल और संदेशों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

जम्मू-कश्मीर के एक आईपीएस अधिकारी ने कहा कि ‘राष्ट्र विरोधी गतिविधियों’ में आतंकवाद का समर्थन या बढ़ावा देने के रूप में कथित कार्रवाई शामिल हो सकती है.