वकील ने SC में एफिडेविट दाखिल कर खुद को बताया भगवान राम का वंशज

Hanuman Prasad Aggarwal filed an affidavit in Supreme Court claiming himself to be a descendant of Lord Ram

त्रेता युग के मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम कलयुग में भी प्रासंगिक हैं। भगवान राम आज देश में एक बड़ी चर्चा का विषय है, सड़कों से लेकर संसद और फिर कोर्ट तक भगवान राम आज सुर्खियों में हैं।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के वकील हनुमान प्रसाद अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल करते हुए ये दावा किया है कि वे भगवान राम के वंशज हैं।

उन्होंने इस पक्ष में दलील देते हुए कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या कोई भगवान राम का वंशज है?

जब मुझे इसकी जानकारी मिली तो मैंने इंटरनेट से साक्ष्य इकट्ठा करके एफिडेविट तैयार किया और इसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है। 

हनुमान प्रसाद अग्रवाल ने आगे गहा कि यह अग्र भागवत में लिखा गया है कि अग्रवाल समुदाय के पूर्वज महाराजा अग्रसेन भगवान राम के बेटे कुश की 34वीं पीढ़ी के वंशज थे।

आज सभी अग्रवाल महाराजा अग्रसेन के बेटे और पोते की तरह हैं ऐसे में ये सभी भगवान राम के वंशज हुए। 

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी ने खुद को भगवान राम का वंशज होने का दावा किया हो।

इसके पहले राजस्थान के राजघराने भी खुद को भगवान राम का वंशज बता चुके हैं। बीजेपी सांसद और उदयपुर के अरविंद सिंह मेवाड़ ने भी खुद को भगवान राम का वंशज बताया था।

उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि मेरा परिवार भगवान श्री राम का प्रत्यक्ष वंशज है।

हम राम जन्मभूमि पर कोई दावा नहीं करना चाहते लेकिन हम चाहते हैं कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बने।

 वहीं जयपुर के राजघराने की सदस्य और बीजेपी सांसद दीया कुमारी भी दावा कर चुकी हैं कि भगवान राम के वंशज दुनियाभर में है जिसमें उनका परिवार भी है।

उनके मुताबिक उनका परिवार भगवान राम के बेटे कुश का वंशज है। 

उल्लेखनीय है कि अयोध्या राम जन्म भूमि विवाद की सुनवाई देश के सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए 8 मार्च को उच्चतम न्यायलय के पूर्व न्यायाधीश फकीर मुहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति  का गठन किया था।

इस समिति में ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल हैं।

ये मध्यस्थता समिति जब इस मामले पर किसी समाधान पर पहुंचने में कामयाब नहीं हुई तो आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है।

15 अगस्त के बाद से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना इस मामले पर दोनों पक्षों में बहसऔर सुनवाई का सिलसिला लगातार जारी है।