पिछले 7 दिन से लगातार कम हो रही हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, क्या और सस्ता होगा?

तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बुधवार को कटौती करके लगातार सातवें दिन राहत दी. दिल्ली में पेट्रोल 0.09 पैसे गिरकर 81.25 रुपये लीटर हो गया है, जबकि डीजल का भाव गिरकर 74.85 रुपये लीटर हो गया. वहीं, मुंबई में आज पेट्रोल का भाव 86.73 प्रति लीटर और डीजल 78.46 प्रति लीटर है. पिछले सात दिनों में दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 1.58 रुपये, 1.55 रुपये कोलकाता, 1.56 रुपये मुंबई और 1.66 रुपये चेन्नई में कटौती हो चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहने का थोड़ा-बहुत लाभ भारतीय तेल कंपनियां दे रही हैं. लेकिन क्या आगे भी तेल सस्ता होगा? यह बड़ा सवाल है और आइये जानते हैं कि आगे और क्या हो सकता है.

सऊदी अरब ने बढ़ाई कच्चे तेल की आपूर्ति
ईरानी तेल पर चार नवंबर से अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका है. ईराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. वह भी 90 दिन के मानक के बजाय 30 दिन की क्रेडिट ही देता है. अमेरिका कई देशों पर ईरान से तेल आयात को बंद करने के लिए दबाव डाल रहा है. दक्षिण कोरिया ने सितंबर माह में ईरान से तेल आयात नहीं किया. कच्चे तेल के बड़े निर्यातकों में से एक सऊदी अरब ने कहा है कि वह तेल बाजार में अहम भूमिका निभाएगा और आपूर्ति बढ़ाएगा. सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल फलिह का कहना है हम एक एक जिम्मेदार देश हैं और तेल-राजनीति को घालमेल नहीं करते. उन्होंने यह भी कहा है कि इस बार 1973 जैसे हालात नहीं बनेंगे.

इस महीने की शुरुआत में वॉशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार और अमेरिकी नागरिक जमाल खशोगी की हत्या के विरोध में अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ हथियारों का बड़ा सौदा रद्द करने की धमकी दी है. अगर ऐसा होता है तो भारत के सामने तेल के मोर्चे पर मुसीबत और बढ़ जाएगी. उधर, सऊदी अरब ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका उसके खिलाफ कार्रवाई करता है तो फिर वह तेल की कीमत तिहरे अंकों में पहुंचा देगा. इस घटना के संबंध में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री का कहना है, “वह घटना बीत चुकी है. सऊदी अरब एक जिम्मेदार देश है और दशकों से हमने अपनी तेल नीति को एक जिम्मेदार आर्थिक औजार के तौर पर इस्तेमाल किया है और इसे राजनीति से दूर रखा है.” उन्होंने साफ कहा कि हम मांग को पूरा करके सुनिश्चित करेंगे कि हमारे ग्राहक देश संतुष्ट रहें.
और अभी रास्ते तलाश रहा भारत
भारत, अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के अन्य रास्ते तलाश रहा है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए ईरान परमाणु सौदे से बाहर होने की घोषणा करने के बाद तेहरान पर फिर से कुछ प्रतिबंध लगा दिए थे. इससे ईरान से तेल आयात करना मुश्किल हो गया है. विदेशी मुद्रा भुगतान एक अंतरराष्ट्रीय निपटान व्यवस्था के जरिये होता है जिस पर अमेरिकी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का दबदबा है। इसलिए अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. भारत तेहरान से तेल खरीदना जारी रखने का इच्छुक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में पश्चिम एशियाई देशों के तेल मंत्रियों से अपील की थी कि वे भारत के लिए तेल की कीमत रुपये के संदर्भ में तय करने पर विचार करें.