50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले संस्थानों को डिजिटल पेमेंट के भुगतान पर नहीं देना होगा शुल्क

सरकार कैशलेश अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। इसी के तहत शुक्रवार को सरकार ने साफ कर दिया कि एक नवंबर से बैंक और अन्य सेवा प्रदाता उपभोक्ताओं या मर्चेंट से मर्चेंट डिस्काउंट रेट व शुल्क नहीं वसूलेंगी। यह सुविधा उन संस्थानों को मिलेगी जिनका टर्नओवर 50 करोड़ से ज्यादा का है और उन्हें डिजिटल मोड में पेमेंट की गई हो।  अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी प्रतिष्ठानों को अपने ग्राहकों को कम लागत वाले भुगतान के डिजिटल मोड की पेशकश करनी चाहिए और ट्रांजेक्शन पर आने वाली लागत को आरबीआई तथा बैंकों को वहन करना चाहिए।

इस घोषणा के बाद आयकर अधिनियम के साथ-साथ पेमेंट एवं सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में संशोधन किया गया। सीबीडीटी ने एक सर्कुलर में कहा है कि नए प्रावधान आगामी एक नवंबर, 2019 से प्रभाव में आएंगे।