जम्मू-कश्मीरः रामनगर में 12 बच्चों की मौत का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग

उधमपुर जिले के रामनगर ब्लॉक में 12 बच्चों की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास पहुंच गया है। जम्मू के सामाजिक कार्यकर्ता और प्रॉमीनेंट सिटीजन एडवाइजरी कमेटी के पूर्व सदस्य सुकेश चंद्र खजूरिया ने इस मामले की याचिका दोनों आयोगों को भेजकर मामले की जांच कराने व प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की है।
अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद पूरी घटना की जांच के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर विशेषज्ञों की टीम का गठन किया गया था। बाद में हिमाचल प्रदेश में सिरप आपूर्ति करने वाली कंपनी को बंद भी किया गया था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी गई याचिका में खजूरिया ने कहा कि रामनगर में 12 बच्चों की मौत के लिए पूरी व्यवस्था जिम्मेदार है। बच्चों को खोने वाले परिवार आर्थिक रूप से कमजोर और अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। इस मामले में जांच को केवल दवा की सैंपल जांच तक ही सीमित कर दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों ने कोल्ड बेस्ट-पीसी सिरप दवा के सेवन से बच्चों की मौत की पुष्टि की है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी सदन में इसका आधिकारिक रूप से जवाब दे चुके हैं। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में अभी तक पीड़ित परिवारों की सुध नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मी की मौत पर दिल्ली सरकार ने मृतक अंकित शर्मा के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है।

वहीं, रामनगर में गरीब परिवारों के 12 मासूमों की मौत पर कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। यह दर्शाता है कि घटिया और जानलेवा दवाओं उत्पादक सरकारी अमले से गठजोड़ कर अपना गोरखधंधा चलाते हैं। रामनगर मामले में बच्चों को जीवित तो नहीं किया जा सकता है लेकिन गरीब परिवारों को न्याय जरूर दिलाया जा सकता है।