गलवान घाटी में चीनी सेना 1.5 KM पीछे हटी, डिसइंगेजमेंट के तहत हुआ ये फैसला

भारत और चीन सीमा विवाद के बीच बड़ी खबर आई है. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन ने 1.5 से 2 किमी तक अपने टैंट पीछे कर लिए हैं. ये टैंट चीने ने पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से पीछे किए हैं. पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 वही जगह से जहां 15-16 जून की दरम्यानी रात भारत-चीन सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. चीन ने ये टैंट डिसइंगेजमेंट के तहत पीछे हटाए हैं. दोनों देशों की सेना ने डिसइंगेजमेंट पर सहमति जताई है और सेनाएं मौजूदा स्थान से पीछे हटी हैं. इस डिसइंगेजमेंट के साथ ही भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच नियंत्रण रेखा पर बफर जोन बन गया है.

इस मामले पर रक्षा विशेषज्ञ केके सिन्हा ने कहा, “हमने चीन से कहा था कि गलवान घाटी पर हमारा अधिकार है, आप यहां से अपनी सेना हटा ले, लेकिन वह नहीं माने. फिर भारत-चीन के बीच सेनाओं के 5 किमी पीछे हटने की बात हुई थी. लेकिन चीनी सेना अभी सिर्फ 1.5 किमी पीछे हटी है.”

दरअसल, भारत और चीन की सेनाओं के बीच 30 जून को करीब 10 घंटे तक कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी. इस बातचीत का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख के टकराव वाले क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे करने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देना था. भारत ने पुरानी स्थिति बहाल करने और तत्काल चीनी सैनिकों को गलवान घाटी, पेंगोंग सो और अन्य इलाकों से वापस बुलाने की मांग की थी.
इससे पहले दोनों पक्षों के बीच 22 जून को हुई वार्ता में पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले सभी स्थानों पर पीछे हटने को लेकर परस्पर सहमति बनी थी. पहले दो दौर की बातचीत एलएसी के पास चीनी जमीन पर मोल्दो में हुई थीं. गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद सरकार ने सशस्त्र बलों को 3500 किलोमीटर लंबी एलएसी के पास चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी छूट दे दी.

7 हफ्तों से भारत और चीन के सेनाओं के बीच तनाव

पूर्वी लद्दाख के विभिन्न स्थानों पर गत सात हफ्ते से भारत और चीन के सेनाओं के बीच तनाव है और यह तनाव और बढ़ गया जब 15 जून को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए. चीनी पक्ष को भी नुकसान हुआ लेकिन उसने इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की.