‘सशस्त्र बलों के निर्माण कार्य को सुगम बनाने वाले सामरिक क्षेत्रों की आलोचना बेबुनियाद’

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कहा कि सैन्य बलों के निर्माण को सुगम बनाने संबंधी सामरिक क्षेत्रों की आलोचना बेबुनियाद है क्योंकि इस बारे में जो फैसला लिया गया है, उसमें किसी भी वर्तमान कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘सरकार ने हाल ही में सामरिक क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के नियमन के लिए विशेष विधान को मंजूरी दी है, जो सशस्त्र बलों के अभियान और प्रशिक्षण उद्देश्य से जरूरी हैं। इस फैसले के संबंध में मीडिया में कुछ संदेह प्रकट किया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘फैसले का सीधा मतलब है कि सशस्त्र बलों की मौजूदा भूमि पर तथाकथित अधिसूचित ‘सामरिक क्षेत्रों’ में मास्टर प्लान के विकास नियंत्रण नियमों के अनुरूप निर्माण गतिविधियों को तथा पर्यावरण सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सशस्त्र बलों की ही है।’’

प्रवक्ता ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर लोगों को इस तरह गुमराह कर रहे हैं, जैसे कि जमीन सशस्त्र बलों को हस्तांतरितत की जा रही हो और पूरे जम्मू कश्मीर को सैन्य अड्डा बनाया जा रहा हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आरोप लग रहा है कि नये क्षेत्रों को सामरिक घोषित किया जा रहा है, जहां विकास के नियमन संबंधी कानून नहीं रहेंगे। ये तथ्यों को जाने बगैर की जा रही बेबुनियाद टिप्पणियां हैं।’’

उपराज्यपाल जी सी मुर्मू की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां प्रशासनिक परिषद (एसी) की बैठक हुई, जिसमें निर्माण परिचालन नियंत्रण अधिनियम, 1988 और जम्मू कश्मीर विकास अधिनियम, 1970 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी ताकि सामरिक क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के लिए विशेष विधान हो।