J&K: लालचौक में शान से लहरा रहा तिरंगा, न किसी ने एतराज किया-न पत्थरबाजी हुई

सच में कश्मीर बदल रहा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर का लाल चौक, जहां हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा लहराने को लेकर तनाव पैदा हो जाता था। पुलिस का पहरा लगाना पड़ता था। अब यहां ऐसा कुछ नहीं है। कश्मीर की सियासत और पहचान का पर्याय लालचौक में स्थित घंटा घर के शिखर पर आज सुबह से ही राष्ट्रीय ध्वज शान से लहराता नजर आ रहा है। किसी ने इस पर न तो एतराज जताया और न ही इसे देखकर किसी ने पत्थरबाजी की। सभी इसे व्यवस्था में बदलाव का नतीजा बता रहे हैं।

घंटा घर के शिखर पर राष्ट्रीय ध्वज को देखकर स्थानीय लोग भी हैरान थे। अख्तर रसूल ने कहा कि लाल चौक में झंडा पहले भी लहराया जाता रहा है, लेकिन पहरे में। मुझे आज भी याद है कि 2008 में 15 अगस्त की सुबह यहां सुरक्षाबलों ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। उसके कुछ ही देर में पाकिस्तान समर्थकों की भीड़ ने आकर उसे उतार दिया। उसके स्थान पर पाकिस्तानी झंडा लहरा दिया गया। आज देखो यह कितनी शान से लहरा रहा है।

लाल चौक से चंद कदम की दूरी पर कोकर बाजार में रहने वाले अनवर लोन ने कहा कि घंटाघर के ऊपर आज सुबह से ही राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा है। कोई हंगामा नहीं हुआ। किसी ने यहां शोर नहीं मचाया। पहले तो यहां जब काई तिंरगे का नाम लेता था तो हड़ताल हो जाती थी। पथराव होता था। पुलिस को पत्थरबाजों से तिरंगा लहराने वाले को बचाना पड़ता था। उसके खिलाफ ही कार्रवाई हो जाती थी।

उन्होंने कहा कि बीते साल जो संवैधानिक बदलाव हुआ है, यह उसका ही नतीजा है। यह झंडा कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद की हार का एलान कर रहा है। यह कश्मीर में शांति, खुशहाली और विकास के दौर के आगमन का एलान कर रहा है। यह बदली व्यवस्था और बदले माहौल का एलान है। यह इस बात का भी सूचक है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब यह नया कश्मीर है।