जम्मू कश्मीर में स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार और शासन की सुगमता पर जोर

पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किये जाने के एक साल बाद अब केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शासन की सुगमता और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर ध्यान दे रहा है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। प्रशासन की उपलब्धियां गिनाते हुए अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन ने ‘नया कश्मीर’ की अवधारणा को गले लगाया और सामाजिक क्षेत्र विकास, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, स्वच्छ भारत मिशन तथा कौशल विकास एवं रोजगार का सृजन को सुनिश्चित किया।बीते साल पांच अगस्त को केंद्र ने पूर्ववर्ती राज्य (जम्मू कश्मीर) का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों– जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में बांट दिया था। दोनों नये केंद्रशासित प्रदेश पिछले साल 31 अक्टूबर को अस्तित्व में आये। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के भेदभावकारी और अनुचित कानून या तो निरस्त कर दिये गये, या संशोधित कर दिये गये। उनमें रणबीर दंड संहिता और संपत्ति अंतरण अधिनियम, आदि शामिल है। उन्होंने बताया कि इसके अलाव अब केंद्र के 170 से अधिक कानून केंद्रशासित प्रदेश में लागू हैं जिनमें अनुसूचित जाति/जनजाति सुरक्षा के अधिकार, वनवासियों के अधिकार, किशोरों आदि से जुड़े प्रगतिशील कानून हैं। अधिकारियों ने दावा किया कि जम्मू कश्मीर के लेाग अब किसी अन्य भारतीय नागरिक की भांति समान अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं । लोगों के हितों की रक्षा के लिए नागरिकता कानून लागू किया गया और पात्र लोगों को प्रमाणपत्र जारी किये गये, ताकि सरकारी नौकरियों के द्वार उनके लिए भी खुलें। इनमें पाकिस्तान से आये शरणार्थी, गोरखा, सफाईकर्मी, जम्मू कश्मीर के बाहर के लोगों से शादी करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं।