कोरोना वायरस: शरीर में माइक्रो आरएनए कम होने से है बुजुर्गों को खतरा

कोरोना की चपेट में आने वाले लोगों में बुजुर्गों की संख्या अधिक है। वैज्ञानिकों और चिकित्सकों का मानना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से ऐसा हो रहा है। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के अध्ययन में पता चला है कि शरीर में माइक्रो आरएनए जींस की कार्यक्षमता को नियंत्रित करते हैं। ये वायरस के शरीर में प्रवेश करते समय सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ माइक्रो आरएनए कम होते रहते है जिससे संक्रमण का ज्यादा खतरा है।
अमेरिका के अगस्ता यूनिवर्सिटी के प्रो. कार्लोस एम इसेल्स का कहना है कि कोरोना मुख्य कोशिकाओं पर कब्जा करके अपनी संख्या आसानी से बढ़ा लेता है। एजिंग एंड डिसीज जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार माइक्रो आरएनए वायरस के आरएनए को खत्म करता है।
मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों में ऐसा होने की संभावना अधिक रहती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बढ़ती हुई उम्र और कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते माइक्रो आरएनए की संख्या घटने लगती है। इस कारण वायरस से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है। 

सार्स के चार व कोरोना के 29 सैंपल की जांच

वैज्ञानिकों ने इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए सार्स वायरस के चार सैंपल और कोरोना वायरस के 29 सैंपल की जांच की। कोरोना के सैंपल अमेरिका और जर्मनी समेत 17 देशों से जनवरी से अप्रैल के बीच लिए गए। अध्ययन में पता चला कि 848 माइक्रो आरएनए ने सार्स पर हमला बोला तो कोरोना पर 873 माइक्रो आरएनए ने हमला कर दिया।ये भी पता चला है कि 558 माइक्रो आरएनए जो सार्स के खिलाफ लड़ते थे वे काविड-19 से भी  लड़ रहे हैं। 315 माइक्रो आरएनए कोरोना में पूरी तरह अलग है जबकि सार्स में ये संख्या 290 थी। कोविड-19 पर माइक्रो आरएनए वायरस के खिलाफ दस से अधिक स्थानों पर हमला कर रहा है।