J&K: ISI का ‘380 प्लान’ डिकोड- आतंकी हमले के लिए महिला आतंकियों की कर रहा भर्ती

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमले के लिए पाकिस्तान (Pakistan) की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) महिला ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की भर्ती कर रहा है, जिससे साथी आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचाया जा सके. सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी फंडिग पर लगाम लगने के बाद से आईएसआई ने अब आतंकियों की फंडिग करने के लिए टिफिन प्लान बनाया है.

पिछले दिनों जम्मू पुलिस ने आतंकी फंडिग की ऐसी ही कोशिश में डोडा के रहने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया था जो आतंकी ग्रुप लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को टिफिन बॉक्स के जरिए पैसे पहुंचाता था. पुलिस ने टिफिन बॉक्स से डेढ़ लाख रुपये बरामद करके आतंकियों की बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया था.

सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक ISI सुरक्षा एजेंसियों की नजर से आतंकियों को बचाने के लिए महिला OGW का सहारा ले रही है. महिला OGW आतंकियों के ग्रुप को एक जगह से दूसरे जगह ले जाती हैं. ग्रुप में महिला सदस्य मौजूद होने से कई बार आतंकी सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं. जानकारी के मुताबिक कुछ मामलों में ये देखा गया है कि महिला OGW लाइन ऑफ कंट्रोल से कश्मीर में घुसपैठ में कामयाब हुए आतंकियों की भी मदद करती हैं.

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक ISI ने आतंकियों को निर्देश दिया है कि वो मोबाइल के इस्तेमाल से बचें और कोड वर्ड के जरिए ही दूसरे आतंकी या उनके कमांडर से बात करें. यही नहीं आतंकियों को लो प्रोफाइल रहने को कहा गया है जिससे उनके बारे में खुफिया जानकारी आसानी से इकट्ठी ना की जा सके.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक LoC पर भारी संख्या में आतंकियों का जमावड़ा है. सभी आतंकी पाकिस्तानी सेना की मदद से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की बड़ी साजिशों में लगे हुए हैं. देश की अलग-अलग खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 380 आतंकी LoC से सटे लॉन्चिंग पैड पर जमा हैं जिन्हें भारत में दाखिल करवाने के लिए पाकिस्तानी सेना लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रही है.

एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले के लिए बॉर्डर एक्शन टीम को भी सक्रिय किया है जिससे खतरा बना हुआ है. एलओसी से सटे इलाकों में आतंकियों के कई ग्रुप पाकिस्तानी सेना के कैंपों में भी देखे गए हैं.

सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक हम आपको बताते हैं कि किन-किन इलाकों में आतंकियों के कितने ग्रुप सक्रिय हैं जो जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की तैयारी में हैं.

1- गुरेज सेक्टर से सटे लॉन्चिंग पैड पर लश्कर और जैश के 30 आतंकियों के ग्रुप होने की जानकारी मिली है.

2- मच्छल सेक्टर से सटे लॉन्चिंग पैड पर अल बदर, जैश और लश्कर के 40 से ज्यादा आतंकियों के ग्रुप मौजूद हैं.

3- केरन सेक्टर से सटे लॉन्चिंग पैड पर 30 आतंकी मौजूद हैं. जो कुपवाड़ा में दाखिल होने की साजिश में लगे हैं.

4- तंगधार सेक्टर से सटे लॉन्चिंग पैड पर 50 से ज्यादा आतंकी हैं, जो अल बदर और लश्कर के ग्रुप हैं. पाकिस्तानी सेना इन इलाकों में बैट एक्शन की तैयारी में लगी है.

5- नौगाम सेक्टर से सटे लॉन्चिंग पैड पर 15 के करीब आतंकियों के ग्रुप को देखा गया है.

6- उरी से सटे लॉन्चिंग पैड पर 25 के करीब आतंकियों को देखा गया है जो पाकिस्तानी सेना के साथ भारतीय सुरक्षा बलों पर बैट एक्शन की तैयारी में हैं.

7- पुंछ से सटे लॉन्चिंग पैड पर लश्कर और हिजबुल ग्रुप के 40 से ज्यादा आतंकी होने की जानकारी मिली है जो IED ब्लास्ट के जरिए सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश में लगे हैं.

8- बिम्भर गली से सटे लॉन्चिंग पैड पर 40 से ज्यादा आतंकी मौजूद हैं.

9- कृष्णा घाटी से सटे लॉन्चिंग पैड पर लश्कर और जैश के 30 से ज्यादा आतंकी बैट एक्शन की तैयारी में हैं.

10- नौशेरा, अखनूर और द्रास सेक्टर से सटे लॉन्चिंग पैड पर भी 30-40 आतंकियों के ग्रुप को देखा गया है जो घुसपैठ की साजिश में लगे हुए हैं.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना चीन से भारत के तनाव का फायदा उठाने में लगी हुई है. हालांकि भारतीय सेना लाइन ऑफ कंट्रोल और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल दोनों पर पूरी तरह से चौकस है. आतंकी जम्मू-कश्मीर में नए रूट के जरिए घुसपैठ की कोशिश में लगे हुए हैं

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से सुरक्षा हालात में काफी सुधार हुआ है. जहां पिछले साल की तुलना में आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई है. वहीं आए दिन होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी देखी जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल जनवरी से लेकर जून महीने तक सिर्फ 40 पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई हैं जबकि साल 2019 में सुरक्षा बलों के खिलाफ कुल 666 बार पत्थरबाजी हुई और 2018 में 851 के करीब ऐसे मामले सामने आए थे. हालांकि जानकारी के मुताबिक हिंसा में आई कमी के पीछे सुरक्षा बलों की बेहतर रणनीति के साथ-साथ कोविड का संक्रमण भी एक वजह हो सकता है.

मौजूद सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीरी युवाओं के आतंकी गुटों में शामिल होने के मामलों में भी काफी कमी देखी गई है. इस साल जनवरी से लेकर जून महीने तक कुल 68 युवाओं के आतंकी संगठन से जुड़ने की रिपोर्ट सामने आई है जबकि पिछले साल ये संख्या 120 के करीब थी. स्थानीय युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने में 40 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने वाली हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को भी इसी साल करार झटका लगा जब उसके नेता सैयद अली शाह गिलानी ने खुद को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से अलग कर लिया.

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से लेकर 27 जुलाई तक कुल 141 आतंकियो का सफाया किया जा चुका है, जिसमें सबसे ज्यादा 57 हिजबुल के आतंकी हैं. वहीं पिछले साल अब तक 151 आतंकियों को मारा गया था जिसमें 46 हिजबुल के आतंकी थे.