जम्मू कश्मीरः पीडीपी के वरिष्ठ नेता ने तीसरे मोर्चे में शामिल होने की इच्छा की जाहिर

जम्मू कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को एक बड़ा झटक देते हुए वरिष्ठ नेता और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने तीसरे मोर्चे में शामिल होने की अपनी इच्छा जाहिर की है. ये तीसरा मोर्चा पूर्व अलगाववादी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख साजद गनी लोन का दल है. अपने निवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए बेग ने पीडीपी को लोगों से किए गए वादे पूरे करने में नाकाम बताया करार दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर सांसद का चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने मजबूर किया.

पीडीपी के फाउंडर और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने निकाय और पंचायती चुनावों का बहिष्कार करने के लिए अपनी पार्टी पीडीपी को लताड़ते हुए कहा कि वह तीसरे मोर्चे में शामिल होने पर विचार गंभीरता से करेंगे. पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस भाजपा को राज्य में सत्ता से दूर रखने के लिए हाथ मिला सकते हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पीडीपी का गठन राज्य में परिवार शासन को खत्म करने और लोकतंत्र लाने के लिए हुआ था. अब एनसी-पीडीपी का गठबंधन की बात होती है. जम्मू के लोगों की कैसे प्रतिक्रिया होगी. कैसे लद्दाख के लोग प्रतिक्रिया देंगे. यह एक धर्म का गठबंधन होगा. जम्मू के लोग इसे पसंद नहीं करेंगे, लद्दाख राज्य का हिस्सा नहीं बनेगा. यह राज्य के विभाजन का कारण बन जाएगा.

एनसी या पीडीपी को भविष्य में विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना का जवाब देते हुए बेग ने कहा ” मुझे नहीं लगता है कि एनसी या पीडीपी कभी बहुमत हासिल कर पायेगी. यह एक लहर थी 2014 के विधानसभा चुनावों में और हमको (पीडीपी) 30 सीट मिली.” पीडीपी-बीजेपी गठबंधन पर, उन्होंने कहा कि यह गठबंधन मुफ्ती मोहम्मद सईद के उम्मीदों पर नहीं उतरा. गठबंधन, अगर सही तरीके से लागू किया गया होता तो मौका  था भारत के मुसलमानों को बताने का कि वे सुरक्षित है. हम एक सही गठबंधन बनाने में विफल रहे.

बेग ने पीडीपी को विकास ना होने के लिए ज़िम्मेदार मानते हुए कहा कि वो नाकाम रही. ढाई साल के शासन दौरान विकास की कमी साफ़ दिखी. फंड जो रिलीज़ हुए थे उनका उपयोग नहीं किया गया. कोई प्रस्ताव केंद्र को विकास करने के लिए नहीं भेजा गया था. केंद्र (विकास कार्यों के लिए) बिना प्रताव के पैसा नहीं देता है.

बेग ने मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच बातचीत को प्रोत्साहित करने के लिए पाकिस्तान गए थे. पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार है और उनकी सरकार के पास भारत के साथ बातचीत करने का साहस नहीं है. हमने देखा कि मोदी के पाकिस्तान जाने के बाद क्या हुआ (पठानकोट हमला).

राज्य में पहले से ही तीसरे फ्रंट के गठन के बारे में बात चल रही है जिसका नेतृत्व सज़ाद लोन, जो बीजेपी के करीब है और घाटी में बीजेपी को समर्थन दे रहे है. वहीं पीडीपी के कई नेता पहले ही पार्टी के खिलाफ गए हैं और कहते है की राज्य में परिवार शासन को खत्म करने में सजद गाणी लोने का समर्थन करते है.