दरबार मूव की हुई तैयारी पूरी… देखिये श्रीनगर सचिवालय के अंदर की तसवीरें

144 सालों से चली आ रही यह परम्परा जम्मू कश्मीर को प्रतिवर्ष कम से कम 300 करोड़ की चपत लगा देती है लेकिन बावजूद इसके ब्रिटिशकाल से चली आ रही इस परम्परा से मुक्ति इसलिए नहीं मिल पाई है क्योंकि इस संवेदनशील मुद्दे को हाथ लगाने से सभी सरकारें डरती रही हैं। राजधानी बदलने की प्रक्रिया ‘दरबार मूव’ के नाम से जानी जाती है। यह ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही है।

1990 में उस समय इस प्रक्रिया का विरोध ‘दरबार मूव’ के जम्मू से संबंद्ध कर्मचारियों ने किया था जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरमोत्कर्ष पर था और तत्कालीन राज्यपाल श्री जगमोहन के निर्देशानुसार आतंकवाद की कमर तोड़ने का अभियान जोरों पर था, लेकिन सुरक्षा संबंधी आश्वासन दिए जाने के उपरांत ही सभी श्रीनगर आने के लिए तैयार हुए थे। हालांकि यह बात अलग है कि आज भी सुरक्षा उन्हें नहीं मिल पाई है और असुरक्षा की भावना आज भी उनमें पाई जाती है।

आधिकारिक रूप से सचिवालय के बंद होने से सप्ताहभर पहले ही सचिवालय की सभी फाइलों को सचिवालय के बाहर कतार में खड़े असंख्य ट्रकों में लादना आरंभ कर दिया जाता है। सैकड़ों टनों के हिसाब से इन फाइलों को ट्रंकों में बंद कर सील लगा दी जाती है और अति विशिष्ट सुरक्षा व्यवस्था में रवाना किया जाता है।