फारूक अब्दुल्ला बोले, ‘महागठबंधन के लिए नेता नहीं देश है सबसे पहले’

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए विपक्षी दलों के महागठबंधन बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों में लगातार तेजी नजर आ रही है. विपक्षी दल जल्द से जल्द इस महागठबंधन को मूर्त रूप देने की कोशिशों में लगे हुए हैं. इन सबके बीच आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को दिल्ली की सियासत को एकबार फिर से गरमा दिया है. नायडू ने शनिवार को बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की.

अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा है देश- अब्दुल्ला
इस मुलाकात के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नायडू महागठबंधन को लेकर चर्चा करने आए थे. अ्ब्दुल्ला ने कहा कि देश इस समय अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा है. सीएम नायडू यह प्रयास कर रहे हैं कि हम भारत की विविधता को बचाने के लिए कुछ ऐसा करें, जिससे देश का गरीब से लेकर अमीर वर्ग भी देश के साथ अपना जुड़ाव महसूस करे.

महागठबंधन के लिए नेता नहीं देश जरूरी- फारूक
फारूक अब्दुल्ला ने महागठबंधन के नेता के विषय में बोलते हुए कहा कि किसी ने भी यह नहीं कहा है कि कोई व्यक्ति विशेष महागठबंधन का नेता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कभी नहीं कहा कि वह नेता हैं. महागठबंधन बनाने के प्रयासों को लेकर मुद्दा केवल यह है कि क्या हम एक साथ बैठकर इस पर चर्चा कर सकते हैं और इस बात पर विचार करें कि इस देश को कैसे बचाया जा सकता है. गौरतलब है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को महागठबंधन को लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला था. हैदराबाद में आयोजित बीजेपी के एक कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा था कि सभी विपक्षी पार्टियां साथ मिलकर गठबंधन कर लें और बाद में जब कांग्रेस से धोखा खा जाएं तो, #Metoo कैंपेन चलाने के लिए मजबूर हो जाएं.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
राजनाथ सिंह ने इस दौरान कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा. उन्‍होंने कहा ‘जो भी कांग्रेस के साथ गया, उसको मिटने से दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा पाई.’ बता दें कि पूर्व राकांपा नेता तारिक अनवर ने शनिवार को राष्‍ट्रीय राजधानी में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और पार्टी में शामिल हो गए. कटिहार से सांसद अनवर ने हाल में पार्टी प्रमुख शरद पवार से मतभेदों के चलते राकांपा से इस्तीफा दे दिया था. बता दें कि तारिक अनवर (67) को 1999 में शरद पवार और पीए संगमा के साथ सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाने पर कांग्रेस से बाहर कर दिया गया था. अब उन्‍होंने एक बार फिर पार्टी का दामन थाम लिया.

सांसद तारिक अनवर ने थामा कांग्रेस का दामन
दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक नेताओं में से एक और कटिहार से सांसद तारिक अनवर ने बीते माह पार्टी और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था. तारिक ने कहा था कि उन्होंने पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा राफेल मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के बयान से असहमत होने के कारण यह कदम उठाया.