जम्मू कश्‍मीर: मिशन आलआउट के बाद अब सुरक्षा बलों का ‘मिशन 2019’

वर्ष 2018 अपने अंतिम चरण में है और सुरक्षाबल मिशन आलआउट के तहत आतंकियों की कमर तोड़ने में सफल रहे हैं। चालू वर्ष में ही इस मुहिम के तहत 247 आतंकियों को ढेर कर दिया गया। नए वर्ष के आगमन से पूर्व सुरक्षा बल घाटी में आतंक पर अंतिम प्रहार के लिए कमर कस चुके हैं।

मिशन 2019 के तहत लक्ष्य तय किया गया है कि मार्च से पूर्व शेष बचे आतंकियों का पूरी तरह सफाया कर दिया जाए ताकि राज्य में लोकसभा व विधानसभा चुनाव भयमुक्त माहौल में करवाए जा सकें। राज्यपाल प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार के समक्ष जम्मू कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव सबसे बड़ी चु़नौती है। राज्य में हाल ही में संपन्न हुए पंचायत व निकाय चुनावों में बेशक कश्मीर घाटी में आतंकी सिर नहीं उठा पाए।

आतंकी किसी भी जगह मतदान में खलल डालने या फिर उम्मीदवारों को धमकाने नहीं पहुंच पाए और सिर्फ धमकी भरे पोस्टरों तक सीमित रहे।राज्य में विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ अप्रैल-मई माह में ही संभावित हैं। इन चुनाव में आमजन की भागेदारी बढे़गी और उम्मीदवारों की संख्या भी। इससे आतंकी और उनके संरक्षक भली भांति परिचित हैं। वह मुख्यधारा की सियासत से जुड़े लोगों को भी निशाना बनाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर सकते हैं। इन हालात में आतंकी संगठन फिर से सिर उठाएं, उससे पूर्व ही सुरक्षा बल अंतिम प्रहार करने की तैयारी कर चुके हैं।

एनकाउंटर के साथ-साथ उनके सुरक्षा बल आतंकी संगठनों में नए लोगों की भर्ती रोकने में कामयाब रहे, साथ ही ओवरग्राउंड नेटवर्क को भी निशाने पर लिया। वादी में सुरक्षा विशेषज्ञ भी आतंकियों के मंसूबों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रहे हैं। गत जून के बाद ही कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में तेजी का एक कारण सुरक्षा बलों की पुख्ता तैयारी भी मानी जा रही है।