अस्त होते सूर्य को अध्र्य देने के साथ सम्पन्न हुआ छठ का पर्व

छठ का पर्व जिला मुख्यालय पर प्रवासी श्रमिकों द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया।  शुक्ल पक्ष की षष्ठी चैती छठ और कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले इस पर्व के चलते कठुआ कनाल किनारे बनाए गए घाटों पर विशेष तौर पर पूजा अर्चना करते हुए इस पारंपरिक व्रत को पूरा किया। अस्त होते हुए सूर्यदेव को अध्र्य देने के साथ ही व्रत खत्म हुआ। यहां आयोजित कार्यक्रम में टोलियों ने पारंपरिक लोकगीत भी सुनाए। सी.टी.एम. की ओर से यहां पूरी तैयारियां व्रत को लेकर की गई थी।

मान्यता है कि छठ देवी सूर्यदेव की बहन है। इसलिए छठ पर्व पर छठ देवी को प्रसन्न करने हेतु सूर्य देव को प्रसन्न किया जाता है। गंगा-यमुना या किसी भी नदी, सरोवर के तट पर सूर्यदेव की आराधना की जाती है। मान्यता है कि खरन पूजन से ही छठ देवी प्रसन्न होती है और घर में वास करती है। छठ पूजा की अहम तिथि षष्ठी में नदी या जलाशय के तट पर भारी तादाद में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और उदीयमान सूर्य को अर्ध्य समर्पित कर पर्व का समापन करते हैं। छठ व्रत पूर्ण नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। श्रद्धा भाव से किए गए इस व्रत से नि:संतान को संतान सुख की प्राप्ति होती हैं और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।