जम्मू-कश्मीर: ट्रांसजेंडर को ओबीसी केटेगरी की सभी सुविधाएं, नौकरी सहित इन जगहों पर मिलेगा आरक्षण

जम्मू-कश्मीर में ट्रांसजेंडरों के कल्याण के लिए सरकार की ओर से नीति तैयार की गई है। इसके तहत इन्हें ओबीसी केटेगरी की सभी सुविधाएं मिलेगी। यहां तक कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ भी। सरकार की ओर से तैयार नीति के अनुसार वैसे ट्रांसजेंडर जिनका जन्म अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) संवर्ग में नहीं हुआ है ऐसे सभी को पिछड़ा वर्ग में घोषित किया जाएगा। ये सभी ओबीसी केटेगरी की आरक्षण सुविधाओं के हकदार होंगे।

जो एससी या एसटी संवर्ग के होंगे वे इन संवर्ग की सुविधाओं के हकदार होंगे। इनके लिए आरक्षित सीटों के अतिरिक्त सीटों पर प्रतियोगिता करने से इन्हें रोका नहीं जाएगा। शिक्षा के साथ नौकरियों में भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। यहां तक कि व्यवसायिक पाठ्यक्रम तथा उच्च शिक्षा में भी। विभिन्न भर्ती बोर्ड की ओर से जारी किए जाने वाले फार्म में ट्रांसजेंडर के लिए अलग से कॉलम अंकित करना होगा।

सस्ते ब्याज दर पर लोन
सरकार इनके सेवायोजन के लिए योजनाएं बना सकती हैं। खासकर वोकेशनल ट्रेनिंग व स्वरोजगार के लिए। इन सबके अलावा सरकार इनके स्वरोजगार तथा इनके उत्पादों को बाजार मुहैया कराने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी दे सकती है।

पेंशन, संपत्ति के मालिकाना हक का भी मिलेगा अधिकार
सामाजिक सुरक्षा व पुनर्वास के तहत कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण किया जाएगा। यहां उन्हें पौष्टिक भोजन के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलेंगी। ट्रांसजेंडर बच्चों के साथ ही वैसे लोग जिनका कोई परिवार न हो या जो अनाथ हो या जिनके पास कोई छत न हो वह यहां रह सकते हैं। आय के हिसाब से पेंशन का भी प्राविधान किया जा सकता है। ट्रांसजेंडर किसी को अपनाने या उनकी पसंद के परिवार की ओर से अपनाए जाने के लिए स्वतंत्र होंगे। संपत्ति का मालिकाना हक लेने या एक दूसरे से संपत्ति लेने का प्राविधान होगा। अलग से एचआईवी सर्विलांस सेंटर की स्थापना, मुफ्त में लिंग परिवर्तन सर्जरी तथा अस्पतालों व अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में बिना किसी रोक टोक के जाने की सुविधा भी होगी।

ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की स्थापना
जम्मू व श्रीनगर में ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की स्थापना की जाएगी। यह उनके अधिकारों की रक्षा तथा अन्य सुविधाओं की निगरानी करेगा। बोर्ड नोडल एजेंसी की तरह होगा जो नीति की सभी बातों के क्रियान्वयन पर काम करेगा। इसके साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतर विभागीय समिति का गठन किया जाएगा जो समन्वय स्थापित करेगा। प्रत्येक पांच साल पर इस नीति की समीक्षा होगी।

अन्य बातें
– जम्मू व श्रीनगर में समुदाय के लिए अलग मॉडल पुलिस थानों की स्थापना।
– यौन हिंसा, यौन उत्पीड़न व घरेलू हिंसा पर दंड का प्राविधान। अब तक रणबीर पैनल कोड में ट्रंासजेंडर को यौन हिंसा पीड़ित के रूप में शामिल नहीं किया गया है।
– ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट जारी होगा। यह राशन कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड सभी पर अंकित होगा। समुदाय को मुफ्त में कानूनी सहायता।
– सभी सरकारी अस्पतालों में ट्रांसजेंडर के पंजीकरण व भर्ती के नियम बनेंगे। इनके सेक्स वर्कर होने तथा एचआईवी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने का भी प्रयास किया जाएगा।
– ट्रांसजेंडर के मानवाधिकार उल्लंघन पर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई।
– लिंग छिपाने वाले अभिभावकों तथा इलाज के लिए बिजली के झटके देने वाले अनैतिक काम करने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई।

आपत्तियां व सुझाव 15 दिन में दें
राज्य सरकार की ओर से तैयार नीति पर 15 दिन में सुझाव तथा आपत्तियां मांगी गई हैं। इसे समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर डाला गया है। एक अनुमान के अनुसार रियासत में लगभग डेढ़ हजार ट्रांसजेंडर होंगे।