2018 में सेना ने हिला दी आतंकवाद की बुनियाद, आपरेशन आलआउट से आतंकियों पर करारा प्रहार

वर्ष 2018, जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान व उसकी शह पर खूनखराबा कर रहे आतंकवादियों पर भारी पड़ा। इधर पाकिस्तान की शह पर आतंकवादियों ने नागरिकों व सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की अधिक कोशिशें की तो उधर सेना, सुरक्षाबलों ने भी उन पर मारक प्रहार कर स्थायी शांति कायम करने के लिए लगातार प्रयास किए। सेना, सुरक्षाबलाें ने कश्मीर में आतंकवादियों के खात्मे के लिए आपरेशन आलअाउट चलाकर पौने तीन सौ के करीब आतंकवादी मार गिराए। इनमें तीन दर्जन से अधिक आतंकवादी कमांडर शामिल थे। सितंबर महीने में सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी बरसी पर राजौरी के सुंदरबनी इलाके से नियंत्रण रेखा को पार कर दुश्मन को उसके घर में जाकर मारा।

राज्य में इस वर्ष अब तक आतंकवाद संबंधी 204 मामलों में 452 मौतें हुई। इस दौरान सुरक्षाबलों ने यहां 271 आतंकवादी मारे गिराए तो मुठभेड़ों में 95 सैनिक, सुरक्षाकर्मी शहीद हुए तो 86 नागरिक भी मारे गए। वर्ष 2018 में आतंकवादियों ने राज्य में नागरिकों की हत्या कर दवाब बनाने की कोशिश की। वहीं सेना, सुरक्षाबलों ने दवाब की रणनीति अपनाई जिससे शुरूआती महीनों में पत्थरबाजी में कमी आई। यह अलगाववादियों व आतंकवादियों को रास नही आया। ऐसे में गर्मियों के महीनों में आतंकवादी हमलों में तेजी आई। राज्य में 17 अप्रेल से 17 जून तक आतंकवाद संबंधी 88 मामलों में 72 मौतें हुई। कुल मिलाकर राज्य में इस समय साढ़े चार सौ के करीब मौतें हुई जिनमें देश के लिए कुर्बान होने वाले 95 सुरक्षाकर्मी भी थे।जारी वर्ष में आतंकवादियों ने राज्य में 4 बड़े आत्मघाती हमले किए, इनमें दस फरवरी को जम्मू के सुंजवां कैंटोनमेंट पर आत्मघाती हमला भी शामिल था। इस हमले में 6 सैनिक व एक नागरिक की मौत हुई थी। हमला करने वाले जैश-ए-मोहम्मद के तीनों आतंकवाद मार गिराए थे। कुल मिलाकर इन चार हमलों में 8 सुरक्षाकर्मी, 5 आतंकवादियों, 1 नागरिक समेत 14 मौतें हुई।

 

वर्ष 2018 में घुसपैठ में कमी आने पर पाकिस्तान ने अपनी बार्डर एक्शन टीमों के हमलों में तेजी लाई। साल में सीमा पर पाकिस्तानी सेना की बार्डर एक्शन टीमों ने भी एक दर्जन के करीब छोटे बड़े हमले किए। इस दौरान 18 फरवरी को गुलपुर इलाके में बैट के हमले को नाकाम बनाते हुए इसमें शामिल एक आतंकवादी को मार गिराया गया। पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीमों में आतंकवादियों के साथ पाकिस्तानी सेना के जवानों व एसएसजी हर प्रकार का सहयोग देती रहीं।गृह विभाग के आंकड़ों के अनुसार जारी वर्ष में सेना, सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के छिपने के ठिकाने धवस्त करने में तेजी लाई। एेसे में साल में 74 जगहों पर आतंकवादी ठिकाने धवस्त कर भारी मात्रा में गोला, बारूद, अन्य सामान बरामद हुआ। साल में आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए 55 विस्फोट किए, इनमें दो नागरिक, 7 सुरक्षाकर्मी व 1 आतंकवादी मारा गया। आतंकवादियों, उनके समर्थकों की धपरपकड़ की मुहिम के तहत 209 आतंकवादियों व उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया। वहीं सरेंडर के 3 मामलों में 4 आतंकवादियों ने हथियार डाले।

वर्ष 2018 में मौतों के आंकड़े

  • साल            मामले      नागरिक     सुरक्षाकर्मी      आतंकवादी     कुल
  • वर्ष 2018     204       86           95              271            448
  • वर्ष 2017     164       53           83              218            354
  • वर्ष 2016     112       14           88              115            267
  • वर्ष 2015     88         19           43              116            178
  • वर्ष 2014     90         28           46              114            188

आतंकवादियों को रास नही आया रमजान पर संघर्ष विराम

इस वर्ष राज्य में शांति के लिए रमजान के महीने में केंद्र सरकार का एक तरफा संघर्ष विराम आतंकवादियों को रास नही आया। उलटे रमजान के महीने राज्य में आतंकवाद में तेजी आई। रमजान माह के पहले बीस दिनों में ही आतंकवादियों ने करीब तीन दर्जन नागरिकों, सुरक्षाबलों के जवानों की हत्या कर दी थी। इस दौरान सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड दागने के डेढ़ दर्जन करीब मामले हुए।  केंद्र सरकार ने 17 मई को रमजान पर एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया था कि सेना, सुरक्षाबल पहल नही करेंगे। पाकिस्तान की शह पर आतंकवादियों ने इस संघर्ष विराम को न मानते हुए आतंकवादी हमले तेज कर दिए। ऐसे में रमजान के अंतिम दिनों में आतंकवादी ने कश्मीर से ईद मनाने घर जा रहे पुंछ के सैनिक औंरंगजेब व कश्मीरी पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी। इन हालात में केंद्र सरकार ने ईद के बाद भी संघर्ष विराम जारी रखने की कश्मीरी नेताओं की मांग को दरकिनार करते हुए संघर्ष विराम को समाप्त कर दिया। इसके बाद आतंकवाद के खिलाफ मुहिम ने फिर जोर पकड़ लिया।

सेना ने फिर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया कड़ा संकेत

सीमा पार चल रही आतंकवादी ट्रैनिंग शिविरों पर सेना के सर्जिकल स्ट्राइक जारी रहेंगे। पाकिस्तान को यह कड़ा संकेत देने के लिए सेना वर्ष 2018 में सितंबर महीने के अंत में सर्जिकल स्ट्राइक कर राजौरी जिले के सुंदरबनी के सामने गुलाम कश्मीर में चल रहे आतंकवादी ट्रैनिंग कैंपों में करीब एक दर्जन आतंकवादी मार गिराए। वर्ष 2016 में उड़ी में आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए सेना ने 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक कर दुश्मन को हिला दिया था। इस स्ट्राइक के ठीक दो साल बाद सेना ने अपने जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए सुंदरबनी के मलाह इलाके से गुलाम कश्मीर में घात लगाकर हमला कर आतंकवाद पर कड़ा प्रहार किया। ऐसे में इस साल सेना ने राज्य में सक्रिय आतंकवादियों पर कड़ा आघात करने के साथ आतंकवादी तंजीमों को भी संदेश दिया कि वे नियंत्रण के पार कैंपों में बैठ कर खुद को सुरक्षित न समझें।