कश्मीर में बेजुबानों पर भारी बर्फबारी, बर्फ में दफन हुए पक्षियों के आहार के सभी प्राकृतिक स्रोत

हिमपात और बारिश से सिर्फ आम लोगों की जिंदगी पर ही असर नहीं पड़ा है। वादी में देश-विदेश से आए प्रवासी व स्थानीय पक्षियों के लिए भी संकट पैदा हो गया है। परिंदों और जानवरों को अपने लिए खाना नहीं मिल रहा है। चारों तरफ फैली बर्फ की चादर ने उनके आहार को ढक लिया है। परींदों की हालत को देखते हुए होकरसर, शालबुग, आंचार, डल, नगीन, वुल्लर समेत विभिन्न पक्षी विहारों के आस-पास के लोग घरों के पास खुली जगहों पर और पक्षी विहारों में दाना डाल रहे हैं। कोई चावल छोड़ रहा है तो कोई अन्य प्रकार का खाद्यान्न जो परिंदों के लिए मुफीद है। इसके अलावा कुछ जगहों पर वन्यकर्मी भी देश विदेश से आए मेहमानों के लिए आहार जुटा रहे हैं।

इस समय कश्मीर के पक्षी विहारों में करीब 10 लाख प्रवासी पक्षी आए हैं। इसके अलावा लाखों की तादाद में स्थानीय पक्षी भी हैं। सभी परिंदे खेतों, बागों और जलविहारों के आहार पर निर्भर रहते हैं। हिमपात और बारिश के कारण अब इन परींदों को दाना नहीं मिल रहा है। अपने आहार के अब इन्हें अपने घोंसले और वेटलैंड से दूर जाना पड़ रहा है, जहां वह शिकारियों का शिकार भी बन रहे हैं।

सबाब का काम है पक्षियों को दाना खिलाना

श्रीनगर-बारामुला राजमार्ग पर स्थित होकरसर वेटलैंड से कुछ ही दूरी पर अपने घर के बाहर बर्फ से ढके खेतों में मक्की फेंक रहे सलीम वानी ने कहा कि यह शबाब का काम है। वैसे भी बाहरी मुल्कों से यहां आने वाले यह परिंदे सर्दियों के दौरान हमारी शान और मेहमान हैं। कश्मीरी तो मेहमाननवाजी के लिए मशहूर हैं। अगर यह परिंदे भूखे रहेंगे तो मेहमाननवाजी की हमारी रिवायत को नुक्सान होगा।

परिंदों को आहार देने की अपील

गांदरबल में पशुपालन विभाग ने जनता से अपील की है कि बर्फबारी से परिंदों के आहार के स्रोत बर्फ में दब गए ह। लोग जहां भी संभव हो चावल, गेहूं, बाजरा, मक्की, ज्वार, ओटस सहित कोई भी खाद्य पदार्थ बर्फ के ऊपर बिछा दें, ताकि बेजुबान पेट भर सकें।