जम्मू-कश्मीर में एक साल में बढ़े 20 प्रतिशत टीबी के मरीज

जम्मू: कभी लाइलाज समझे जाने वाली टयूबरक्यलोसिस (तपेदिक) बीमारी के मरीजों की संख्या जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ती जा रही है। एक साल में ही राज्य में करीब बीस प्रतिशत मरीजों का इजाफा हुआ है। डाक्टरों का कहना है कि लोगों में अब इस रोग को लेकर जागरूकता बढ़ी है और इसी कारण मरीज भी अधिक संख्या में इलाज के लिए आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राज्य स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में राज्य में कुल 10506 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इनमें 9420 मरीजों की पुष्टि सरकारी अस्पतालों में हुई जबकि 1056 ने निजी क्षेत्र में टेस्ट करवाए। इससे पहले साल 2014 में दस हजार से अधिक मरीजों में टीबी रोग की पुष्टि हुई थी। साल 2016 में 8269 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई थी। चिंताजनक तथ्य यह है कि सरकारी अस्पतालों में जिन 9420 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई, उनमें से 76 प्रतिशत अर्थात 7143 ने ही इलाज शुरू करवाया। कुल मरीजों में 86 प्रतिशत मरीज नए थे। केवल चौदह प्रतिशत ही ऐसे थे जो कि अपना इलाज पहले भी करवा रहे थे। अभी बीते साल 2018 के आंकड़े सामने नहीं आए हैं। परंतु इस साल भी आठ से दस हजार के बीच मरीजों में टीबी रोग होने की आशंका है।

जम्मू में सबसे अधिक

जम्मू जिले में सबसे अधिक 2710 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इसके अलावा ऊधमपुर में 1162, श्रीनगर में 721, डोडा में 691, अनतंनाग में 680 मरीजों में इस रोग की पुष्टि हुई। इसके अलावा अन्य जिलों बडगाम, बारामुला, कठुआ, कुपवाड़ा, कारगिल, लेह, पुंछ सहित अन्य सभी जिलों में भी इसे राेग के मरीज हैं।

कई मरीजों की मौत

राज्य में 2014 290 लोगों की टीबी से मौत हुई।। साल 2016 में 230 लोगों की इस बीमारी से मौत हो गई। साल 2017 में मौत के आंकड़े तो नहीं हैं। परंतु कुल मरीजों में तीस से चार प्रतिशत मरीजों की मौत होने की आशंका जताई गई है।

यह हैं रोग और लक्षण

टीबी एक बैक्टेरिया के संक्रमण के कारण होता है। इसे फेफड़ों का रोग माना जाता है। परंतु रक्त प्रवाह के कारण यह रोग शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है। टीबी के बैक्टेरिया सांस से शरीर में प्रवेश करते हैं। किसी मरीज के खांसने, छींकने, थुकने के समय बलगम से बैक्टेरिया कई समय तक हवा में रहते हैं और स्वस्थ्य व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर उसे भी बीमार बनाते हैं।

ऐसे होती है जांच

किसी भी मरीज में टीबी की जांच के लिए एक बार सैंपल उस समय लिया जाता है जब वह जांच के लिए आता है। दूसरे दिन फिर सुबह मरीज का टेस्ट होता है। बलगम का टेस्ट करने से मरीजों में टीबी का पता चल जाता है। मरीज को जांच आरएनटीसीपी द्वारा मान्यता प्राप्त लेबेारेटरी में जाकर करवानी चाहिए। वहां जांच नि:शुल्क होती है।

हल्के से न लें

अगर आप को तीन सप्ताह से अधिक खांसी है और थूक में खून आ रहा है तथा वजन भी कम हो रहा है तो इसे हल्के से न लें। यह टयूबरक्यलोसिस भी हो सकता है। टीबी की दवा अगर मरीज समय पर ले और पूरा कोर्स करें तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। अब यह रोग लाइलाज नहीं है।