J&K: तेंदुए ने फिर बच्ची को बनाया शिकार, एक माह में चौथी बार किया हमला, मारने का आदेश

रियासी जिले के माहौर क्षेत्र में आदमखोर तेंदुए ने फिर से हमला बोला और बृहस्पतिवार को फिर एक बच्ची को शिकार बनाया। एक माह में खूंखार तेंदुए ने तीसरी बच्ची को निवाला बनाया है। हालांकि, तेंदुए को मारने के आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन वन विभाग की टीमें इसमें सफल नहीं हो रही हैं। अब क्षेत्र में चिंता हो रही है कि अगला शिकार कौन होगा?

माहौर के नीरम क्षेत्र में देर शाम 10 वर्षीय रुखसाना बानो पुत्री अब्दुल गनी घर से कुछ दूर गई हुई थी। अचानक तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। उसे जबड़े में दबोच कर वह उसे वन क्षेत्र की तरफ ले गया। लोगों ने पूरे क्षेत्र को में तलाशी अभियान चलाया। आधी रात को जंगल में एक स्थान पर बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। इस घटना के बाद लोगों में दहशत और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि आखिर कब तक खुद तथा अपने बच्चों को घरों में कैद रख सकते हैं। इससे पूर्व तेंदुआ 22 मई को छजरू क्षेत्र में आठ वर्षीय राहिला और 30 मई को छजरू की दिलशाद को शिकार बना चुका है।

बाहर से शूटर मंगाए पर तेंदुआ नहीं चढ़ा हत्थे

वन्य जीव संरक्षण विभाग ने आदमखोर तेंदुए को मार गिराने की इजाजत दे दी है। जंगल में तेंदुए को दबोचने के लिए जगह-जगह पिंजरे लगाए गए हैं। वन विभाग, वन्य जीव संरक्षण विभाग और पुलिस की टीमों ने स्थानीय लोगों से मिलकर आदमखोर तेंदुए को मार गिराने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। उसे मारने के लिए शूटरों तक को बुलाया गया है। इससे पूर्व वन्य जीव संरक्षण विभाग ने एक सप्ताह में तेंदुए को मारने के आदेश जारी किए थे, लेकिन पकड़ में न आने पर इजाजत की अवधि 15 दिन और बढ़ा दी।

माहौर क्षेत्र में कई घर जंगलों और पहाड़ों के बीच घिरे हैं। कई बार जंगली जानवर खाने की तलाश में रिहायशी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। इंसानों को देख वे उन पर हमला भी कर देते हैं। यही कारण है कि एक माह से आदमखोर तेेंदुआ माहौर क्षेत्र के कई गांवों विशेषकर छजरू में तीन इंसानी जिंदगियों को लील चुका है जबकि एक बच्ची को घायल कर दिया था।

तेंदुए का ज्यादा आतंक छजरू क्षेत्र में

अभी तक तेंदुए का ज्यादा आतंक छजरू इलाके में व्याप्त रहा है। यह इलाका घने जंगलों से ढका है और जहां पर दुर्गम पहाडिय़ों और उनमें बनी खाइयो में जंगली जीवों के छुपने के लिए काफी जगह है। इस इलाके के ज्यादातर लोग अपने मवेशियों की बेहतर चारागाह के लिए वन क्षेत्र में ही रहते हैं। यही वजह है कि तेंदुए का टकराव इंसानों और उनके मवेशियों से हो जाता है।

इंसानी खून के कारण फिर हमला करेगा

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर एक बार तेंदुए के मुंह में इंसानी खून का स्वाद लग जाए तो वह इंसानी खून का प्यासा हो जाता है जिस पर वह वन्य जीवों के बजाय इंसानों को ही अपना शिकार बनाने की फिराक में रहता है।

कई बार हुआ तेंदुए से हुआ सामना

माहौर इलाके में आदमखोर तेंदुए को मार गिराने की मुहिम में सरकारी टीमों और स्थानीय लोगों द्वारा छेड़े गए संयुक्त अभियान में अभी तक उनका कई बार तेंदुए से आमना-सामना हुआ, लेकिन आदमखोर हर बार बचकर जंगल में गया। वन्य जीव संरक्षण विभाग माहौर क्षेत्र से संबंधित वार्डन मुश्ताक अहमद के मुताबिक आदमखोर तेंदुए की कद काठी काफी बड़ी है। उस जानकारी के मुताबिक अभी तक ऐसा तेंदुआ सामने नहीं आया है। अभियान में शामिल टीमों का लक्ष्य सिर्फ आदमखोर तेंदुए को ही मार गिराना है जिसके लिए अभियान जारी है।