जम्मू-कश्मीर के पंच-सरपंचों की बल्ले-बल्ले, केंद्र और राज्य प्रशासन मेहरबान

धारा 370 का ( Article 370 ) विरोध करके कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले अलगाववादी नेताओं के नजरबंद ( House arrest leader ) होने के बाद केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन का पूरा ध्यान पंच-सरपंचों पर ( Local body Representative ) केन्द्रित है। पंच-सरपंचों के जरिए सरकार अपने निर्णर्यों के खिलाफ किए जा रहे विरोध का रूख बदलने का प्रयास करने के साथ जनप्रतिनिधियों की नई खेप तैयार करने में जुटी हुई है। इस उद्देश्य के मद्देनजर पंचायतों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों रूपया दिया जा रहा है, स्थानीय प्रतिनिधियों को देश भ्रमण कराया जा रहा है।

35 सरपंच देशभ्रमण पर

वर्तमान में संघ राज्य क्षेत्र के कम से कम 35 सरपंच 10 जनवरी से महाराष्ट्र और गुजरात के दौरे पर हैं। ये देखने के लिए इन राज्यों का दौरा किया जा रहा है कि पंचायती राज इन दोनों राज्यों में कैसे काम करता है “यह एक अच्छा अनुभव है क्योंकि हम सीखेंगे कि कौन सी बुनियादी जिम्मेदारियाँ हैं जो एक सरपंच या पंच को पता होनी चाहिए,” एक सरपंच जो इस दौरे का हिस्सा हैं ने बताया सरपंचों के दौरे का दूसरा हिस्सा 23 जनवरी से शुरू होगा, जिसके दौरान पंच अन्य राज्यों के पंचायत सदस्यों के साथ बातचीत करेंगे।

40 हजार स्थानीय प्रतिनिधियों का सुरक्षा बीमा

“केंद्र ने जम्मू कश्मीर प्रशासन को पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने का निर्देश दिया है। आधिकारिक संगठनों ने कहा कि देशाटन का आयोजन सरपंचों को अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान करने का हिस्सा है। पंचायत सदस्यों के लिए प्रोत्साहन यहाँ नहीं रुकता क्योंकि 40,000 से अधिक पंचायत सदस्यों को सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर बीमा कवर के तहत लाया जा रहा है। “सरपंचों और पंचों के एक समूह द्वारा मांग उठाई गई थी जो पिछले साल सितंबर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। इसके बाद, केंद्र ने जम्मू कश्मीर प्रशासन को इस संबंध में सभी उपाय करने के लिए कहा।

बीमा से बढ़ेगी सुरक्षा भावना

सूत्रों ने कहा कि जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इन पंच सदस्यों को बीमा कवर सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है सूत्रों ने कहा कि एक बार प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के बाद, सरकार आकर्षक बीमा कंपनी के लिए निविदा जारी करेगी। “केंद्र का मानना है कि बीमा कवर पंचायत सदस्यों को सुरक्षा की भावना प्रदान करेगा। इसके अलावा मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने वित्तीय आयुक्त वित्त विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं। “

गणतंत्र दिवस पर वीआईपी होंगे पंच-सरपंच

गौरतलब है कि इस गणतंत्र दिवस पर राजनीतिक नेताओं को नहीं बल्कि पंचायत सदस्यों और पार्षदों को जम्मू और कश्मीर के नए केंद्र शासित प्रदेश में “वीआईपी” के रूप में माना जाएगा, क्योंकि अधिकांश राजनीतिक नेता नजरबंद हैं। केंद्र, जम्मू कश्मीर में चुने गए 40,000 स्थानीय प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने की अपनी पहल के तहत, पहले ही पंचायतों की वित्तीय शक्तियों को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये और ब्लॉक परिषदों की 25,000 रुपये से 2.5 लाख रुपये तक कर चुका है।