सीमावर्ती जिलों में रह रहे लोगों के लिए सरकार ला रही अहम योजना, घुसपैठ होगी नाकाम

सरकार देश के सीमावर्ती जिलों में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को पहचान पत्र जारी करेगी और इस संबंध में विस्तृत योजना तैयार की जा रही है. गृह मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी. गृह मंत्रालय ने निर्णय ऐसे समय में लिया है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ के मामलों में वृद्धि देखी गई है. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 से 2018 के बीच तीन वर्षों में सीमापार से घुसपैठ की 371 घटनाएं सामने आई है.

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘‘देश के सभी सीमावर्ती जिलों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को पहचान पत्र जारी करने का सैद्धांतिक अनुमोदन दिया जा चुका है. इस संबंध में विस्तृत योजना तैयार करने का जिम्मा भारत के महापंजीयक को सौंपा गया है.’’ इसके साथ ही सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) को मार्च 2020 तक जारी रखने की भी मंजूरी दी गई है.

केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट रहने वाले लोगों की विशेष विकासपरक जरूरतों और उनके कल्याण संबंधी कार्यों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 17 राज्यों के 111 जिलों के 396 ब्लाकों में राज्य सरकारों के माध्यम से सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम क्रियान्वित कर रही है. इन राज्यों में अरूणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल शामिल हैं.

 

भारत से बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, चीन और म्यामां की सीमा लगती है. साल 2016 में भारत में घुसपैठ की 108 घटनाएं दर्ज की गईं जबकि 2017 में घुसपैठ की 123 घटनाएं तथा 2018 में 140 घटनाएं दर्ज की गई. पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक घुसपैठ की घटनाएं भारत म्यामां सीमा पर हुईं और इस क्षेत्र में ऐसे 282 मामले दर्ज किए गए.

इस अवधि में भारत पाकिस्तान सीमा क्षेत्र से घुसपैठ के 74 मामले, भारत नेपाल सीमा पर घुसपैठ की 12 घटनाएं और बांग्लादेश से लगी सीमा पर घुसपैठ के तीन मामले दर्ज किए गए. भारत चीन सीमा तथा भारत भूटान सीमा पर घुसपैठ के कोई मामले दर्ज नहीं किए गए. सीमा की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों की प्रशासनिक एवं परिचालनात्मक जरूरतों को देखते हुए सीमा सड़कों का निर्माण, बाड़ लगाने तथा तेज रौशनी का प्रबंध किया जाता है.

गृह मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 1689 किलोमीटर, अरूणाचल प्रदेश में 39 किमी, असम में 259 किमी, बिहार में 93 किमी, गुजरात में 279 किमी, हिमाचल प्रदेश में 36 किमी, उत्तर प्रदेश में 106 किमी, उत्तराखंड में 12 किमी, जम्मू कश्मीर में 144 किमी, मेघालय में 399 किमी, मिजोरम में 333 किमी, राजस्थान में 130 किमी, सिक्किम में 68 किमी, त्रिपुरा में 943 किमी सीमा सड़कें पूरी की जा चुकी हैं.

पश्चिम बंगाल में सीमा के 1217 किमी हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है. जम्मू कश्मीर में 185 किमी, मेघालय में 328 किमी, मिजोरम में 164 किमी, राजस्थान में 1038 किमी, पंजाब में 489 किमी, त्रिपुरा में 770 किमी, असम में 210 किमी और गुजरात में 279 किमी बाड़ लगाने का कार्य पूरा किया जा चुका है.