कश्मीरः चिनाब पर बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल, बेअसर होंगे धमाके और भूकंप

कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ने के लिए चिनाब नदी पर विश्व के सबसे ऊंचे रेल पुल का निर्माण किया जा रहा है। बताया गया कि पुल के निर्माण का 83 फीसदी काम पूरा हो चुका है और दिसंबर 2021 तक इसके शुरू होने की संभावना है। मंगलवार को कोंकण रेलवे के एक शीर्ष इंजीनियर ने दावा किया कि यह रेल पुल 40 किग्रा टीएनटी (विस्फोटक) के धमाकों और रिक्टर स्केल पर आठ की तीव्रता वाले भूकंप को सहने की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है।

इस परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे कोंकण रेलवे के चीफ इंजीनियर (समन्वय) आरके हेगड़े ने कहा कि मानव निर्मित एक और आश्चर्य प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और रेलवे बोर्ड की प्रत्यक्ष निगरानी में निर्मित किया जा रहा है। इसके 2021 तक पूरा होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पुल निर्माण की नई दिल्ली में पीएमओ और रेलवे बोर्ड की ‘इलेक्ट्रॉनिक आंखों’ के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
83 प्रतिशत काम पूरा
इसका निर्माण पूरा हो जाने पर चिनाब पुल को विश्व के सबसे ऊंचे रेल पुल (नदी से 359 मीटर ऊपर) और पेरिस के एफिल टावर से करीब 35 मीटर ऊंचा होने का गौरव प्राप्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पुल कटरा और बनिहाल के बीच 111 किमी लंबे खंड में सबसे अहम एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण संपर्क है। यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल संपर्क परियोजना का हिस्सा है। हेगड़े ने कहा कि अब तक 83 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। दिसंबर 2021 चिनाब पुल परियोजना को पूरी करने की अंतिम समय सीमा है।
वाजपेयी काल में शुरू हुआ था काम
हेगड़े ने कहा कि इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाने पर यह चीन में बेइपन नदी पर स्थित शुईबाई रेल पुल (275 मीटर ऊंचा) को पछाड़ देगा। पुल का निर्माण सुरक्षा और अन्य कारणों को लेकर 2008 में रोक दिया गया था। इसे साल 2010 में फिर से शुरू किया गया। यह पहले ही कई समय सीमा को पूरा नहीं कर पाया है। पुल का निर्माण कार्य साल 2002 में शुरू किया गया था जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे।

गुणवत्ता से समझौता नहींः हेगड़े
पुल के बारे में हेगड़े ने कहा, ‘यह 40 किग्रा टीएनटी के उच्च क्षमता वाले विस्फोटों को और रिक्टर स्केल पर आठ की तीव्रता वाले भूकंप को सह सकता है। यहां तक कि विस्फोट के बाद भी ट्रेन 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से इस पर से गुजर सकती है।’ उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है। हमने भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) से खरीदी जा रही भारी मात्रा में इस्पात की चादरों को खारिज कर दिया है।