नियम कानून हवा में उड़ा दिएः जम्मू-कश्मीर बैंक का जब्त रिकॉर्ड जारी करने की याचिका नामंजूर

फर्जी नियुक्तियों के मामले में एंटी करप्शन कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बैंक की अर्जी को नामंजूर कर दिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने नियुक्तियों के मामले में श्रीनगर स्थित बैंक मुख्यालय में छापा मारकर रिकॉर्ड जब्त कर लिया था। इस रिकॉर्ड को वापस देने के लिए बैंक प्रबंधन ने अर्जी दायर की थी। शनिवार को स्पेशल जज आरएन वातल ने मामले पर सुनवाई की। बैंक ने कोर्ट में दलील दी कि मुलाजिमों का इंक्रीमेंट लगाना है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों की नियुक्तियां ही अवैध हैं, उनके लिए इंक्रीमेंट की दलील देकर रिकॉर्ड मांगना हैरत भरा है।
जम्मू-कश्मीर बैंक में 3 हजार से अधिक अवैध नियुक्तियों के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो जांच कर रहा है। ब्यूरो ने बैंक से बैंकिंग अटेंडेंट और सहायक बैंकिंग एसोसिएट की नियुक्तियों की फाइलें जब्त की हैं। कोर्ट में पेश किए तथ्यों के मुताबिक 8 जून 2019 को एसीबी के पास सईद कौसर बैहाकी ने एक ई-मेल करके शिकायत दर्ज कराई।

बताया कि बैंक में 2014 से लेकर अब तक 3 हजार अवैध रूप से नियुक्तियां हुई हैं। जिसमें अधिकतर पीडीपी के कार्यकर्ता शामिल हैं। सैकड़ों सफाई कर्मी बैंक में दस साल से कार्यरत हैं, जिनको बैंक ने स्थायी नहीं किया। दूसरी तरफ पिछले दरवाजे से हजारों अवैध नियुक्तियां कर डालीं।

शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने कोर्ट से अनुमति लेकर सर्च वारंट लिया और कई तरह के दस्तावेज जब्त कर लिए। जिन लोगों के नामों की शिकायतें थीं। उनकी बारीकी से जांच की गई। इनकी नियुक्तियों की निजी फाइलों को निकलवाया गया। इन फाइलों को टटोलने पर बैंक के पूर्व चेयरमैन परवेज अहमद नेंगरू की भतीजी हमीम नुसरत का नाम भी सामने आया। जिसकी नियुक्ति बिना किसी प्रक्रिया को पूरी किए हो रखी थी।