जम्मू-कश्मीरः ऑपरेशन सुदर्शन से सीमाओं के सुरक्षा चक्र को मजबूती

बीएसएफ की ओर से ऑपरेशन सुदर्शन चलाकर अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर सुरक्षा का मजबूत चक्रव्यूह तैयार करने की पहल की गई है। ऑपरेशन सुदर्शन के तहत जम्मू, सांबा व कठुआ जिले में सीमा से 500 मीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों में प्रत्येक व्यक्ति का रिकार्ड खंगाला जाएगा। अस्थायी निर्माणों की भी जांच होगी। साथ ही ऑपरेशन के दौरान संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के लिए खतरनाक टनल आदि की भी तलाश की जाएगी। अभियान शुरू हो चुका है और इसे 16 फरवरी तक पूरा किया जाना है।
सूत्रों के अनुसार बीएसएफ ने इसे ऑपरेशन सुदर्शन 3 नाम दिया है। आईबी के नजदीक 500 मीटर के दायरे के इलाकों को घुसपैठ रोकने के लिहाज से बिल्कुल सुरक्षित बनाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह भी सुनिश्चित किया जाना है कि इस क्षेत्र में देश विरोधी ताकतें किसी प्रकार की गतिविधियों को अंजाम न दे सकें। इस परिधि में सभी घरों, अस्थायी ढांचों तथा अन्य प्रकार के निर्माणों की जांच की जाएगी। बीएसएफ ने अभियान में लगे लोगों को खास हिदायत दी है कि ग्रामीणों को इससे कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए।

हाल में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों के नगरोटा में मुठभेड़ में मारे जाने के बाद यह बात सामने आई थी कि उन्होंने आईबी से घुसपैठ की है। चक दयाला इलाके से घुसपैठ कर इस ओर दाखिल होने की जानकारी के बाद से सभी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। हालांकि, बीएसएफ ने घटना वाले दिन ही यह स्पष्ट किया था कि बॉर्डर पर कहीं भी तारबंदी कटी नहीं है। इसके बाद अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए ऑपरेशन सुदर्शन शुरू किया गया है।

बीएसएफ ने प्रशासन से मांगा सहयोग
बीएसएफ ने ऑपरेशन में सहयोग के लिए प्रशासन को पत्र भेजा है। डिवीजनल कमिश्नर, जम्मू को भेजे पत्र में ऑपरेशन की पूरी जानकारी देने के साथ कहा गया है कि ग्राम प्रधानों तथा बॉर्डर इलाके के प्रमुख लोगों को ऑपरेशन में सहयोग करने के लिए सहमत किया जाए। बीएसएफ का पत्र मिलने के बाद डिवकाम कार्यालय ने जम्मू, सांबा और कठुआ के डीसी को पत्र भेजकर मदद करने को कहा है।

कुल 67 गांव हैं 500 मीटर के दायरे में
आईबी से 500 मीटर के दायरे में 67 गांव आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा जम्मू जिले में 30 गांव हैं। इसके साथ ही कठुआ में 17 और सांबा में 20 गांव हैं। सीजफार उल्लंघन के दौरान ये गांव सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। यहां के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेना पड़ता है।