जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग के गठन पर स‍ियासी घमासान

केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग के गठन के बाद भाजपा और पैंथर्स पार्टी को छोड़ कर अन्य पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में परिसीमन के बाद सात सीटों को बढ़ाया जाएगा। बीते साल अगस्त में संसद द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को पारित किए जाने से पहले लद्दाख की चार सीटों समेत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 निर्वाचित सदस्यों के अलावा दो नामांकित महिला विधायक होती थीं। इनके अलावा 24 सीटें जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गुलाम कश्मीर के कोटे से खाली रहती थीं। इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. सैफुद्दीन सोज ने कहा कि केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर राज्य में विधानसभा के गठन के बाद ही परिसीमन होना चाहिए।

दरअसल, केंद्रीय चुनाव आयुक्त ने गत सोमवार को ही राज्य के प्रस्तावित परिसीमन आयोग के लिए सुशील चंद्रा को अपना प्रतिनिधि नामांकित किया है।

रिपोर्ट में आबादी और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखें सदस्य: मनकोटिया

पैंथर्स पार्टी के राज्य प्रधान बलवंत सिंह मनकोटिया ने कहा कि परिसीमन आयोग में जो एक सदस्य जम्मू-कश्मीर का नियुक्त किया जाएगा, वह गैर राजनीतिक व अच्छी छवि का होना चाहिए। आयोग के सदस्य जनसंपर्क कर क्षेत्र की आबादी व आर्थिक हालत आदि को ध्यान में रखकर अपनी रिपोर्ट तैयार करें।

परिसीमन से जम्मू को मिलेगा इंसाफ: रैना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने कहा कि जम्मू को राजनीतिक रूप से कमजोर रखने के लिए साजिशें होती आई हैं। ऐसे में विधानसभा सीटों का परिसीमन होने से से जम्मू संभाग के साथ इंसाफ होगा।

समय की मांग है परिसीमन

पीडीपी के वरिष्ठ नेता वेद महाजन ने परिसीमन आयोग के गठन को लेकर उठाए गए कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सीटों का परिसीमन होने से लोगों की आकांक्षाएं पूरी होंगी। विधानसभा सीटों का परिसीमन समय की मांग है।