जम्मू-कश्मीर: इंटरनेट पर पाबंदी ने रोकी कामकाज की रफ्तार, पत्राचार में देरी से पहुंच रहे आदेश

जम्मू-कश्मीर में ठप चल रहीं मोबाइल इंटरनेट सेवाओं ने सरकारी कामकाज की रफ्तार पर असर डाल दिया है। एक क्लिक या फिर व्हाट्सएप के जरिए प्रेषित होने वाली सरकारी आदेश अब दस्ती भेजने पड़ रहे हैं। अब सारा काम फिर से पत्राचार पर निर्भर हो गया। ऐसे में आदेश की प्रति पहुंचाने में कहीं चार से पांच दिन लग रहे हैं तो कहीं इससे भी ज्यादा वक्त। इसका सीधा असर आदेश पर अमल की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।सरकारी विभागों में रोजाना औसतन 50 से 60 आदेशों का पत्राचार होता है। सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से इन आदेशों की प्रतियों को विभाग ई-मेल या फिर व्हाट्सएप के जरिए प्रेषित कर रहे थे। हालांकि इसकी एक दस्ती प्रति को बाद में भेज दिया जाता था लेकिन आनलाइन या व्हाट्सएप से प्रेषित आदेश पर काम शुरू हो जाता था।

अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट बंद होने के कारण काफी परेशानी है। निदेशालय या फिर जिला स्तर पर कार्यालयों में ब्राडबैंड सेवा दी गई है। मगर ब्लाक और अन्य पिछड़े इलाकों के कार्यालयों में इंटरनेट सेवाएं हांफ जा रही है। इस कारण आदेश उन्हें नहीं मिल रहे हैं। व्हाट्सएप के माध्यम से भी दिक्कत आ रही है। इस कारण आदेशों की सूचना सीधी फोन पर मिल रही है। लिखित आदेश न होने पर इन पर अमल देरी से हो रहा है।  

सबसे ज्यादा परेशानी शिक्षा विभाग में आ रही है। स्कूलों में समय-समय पर भेजी जानी वाली अधिसूचना ही नहीं मिल पा रही है। इस कारण स्टाफ परेशान है। अध्यापकों को खुद ही शिक्षा कार्यालयों से आदेशों की प्रति लानी पड़ रही है। इसके अलावा कृषि, बागवानी, राजस्व, स्वास्थ्य समेत तमाम विभागों में पत्राचार के माध्यम से ही हर रोज आदेश भेजे जा रहे हैं।