सीआईसी शुक्रवार से जम्मू, कश्मीर व लद्दाख के आरआटीआई आवेदनों की सुनवाई करेगा

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख से संबंधित आरटीआई आवेदकों की अपील और शिकायतों की सुनवाई शुक्रवार से शुरू करेगा। यह सुनवाई पूर्ववर्ती राज्य के पारदर्शी प्रावधानों को निरस्त कर दिए जाने और केंद्रीय अधिनियम लागू किए जाने के करीब नौ महीने बाद शुरू होगी। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। आयोग वीडियो और ऑडियो लिंक के माध्यम से अपील और शिकायतों की सुनवाई कर रहा है। देश में सूचना का अधिकार कानून 2005 में लागू किया था जबकि जम्मू कश्मीर राज्य का अपना कानून ‘‘जम्मू कश्मीर आरटीआई अधिनियम, 2009’’ था। केंद्र ने पिछले साल अगस्त में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के पारित होने के बाद 31 अक्टूबर को राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था। इसके बाद जम्मू कश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम 2009 और उसके नियमों को निरस्त कर दिया गया था और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और उसके नियम लागू हो गए । कार्मिक मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग को एक कार्ययोजना दी थी जिसमें कहा गया था कि वह जम्मू-कश्मीर राज्य सूचना आयोग के समक्ष लंबित सभी अपीलों और शिकायतों को खुद ले ले। आरटीआई अधिनियम के अनुसार राज्यों के अपने सूचना आयोग हैं लेकिन केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित मामलों की सुनवाई केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा की जाती है। मुख्य सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने पीटीआई-भाषा से कहा कि आयोग शुक्रवार से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से संबंधित मामलों की सुनवाई शुरू करेगा।एक सरकारी बयान के अनुसार जुल्का ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से भी मुलाकात की।सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के आवेदक घर से ही आरटीआई आवेदन दाखिल कर सकते हैं और किसी को भी सीआईसी से अपील के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह “घर से न्याय” की एक नयी संस्कृति की शुरूआत करेगा। उन्होंने कहा कि दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के आवेदक नामित अधिकारियों के समक्ष पहली अपील दायर कर सकते हैं और सीआईसी के समक्ष दूसरी अपील के लिए घर से सुनवाई की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, लोग ऑनलाइन कभी भी आरटीआई आवेदन दायर कर सकते हैं।