रिटायर हुए जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य, जानिए क्‍यों सिर्फ तीन उंगलियों से ही करते थे सैल्‍यूट

जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के पूर्व डायरेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) एसपी वैद्य गुरुवार को रिटायर हो गए। अपने रिटायरमेंट का ऐलान उन्‍होंने ट्विटर हैंडल पर किया और अपनी ड्यूटी को देश की सेवा का एक कभी न भूलने वाला पल करार दिया। आपको बता दें कि पूर्व डीजीपी को जम्‍मू कश्‍मीर के उस पुलिस ऑफिसर के तौर पर जाना जाता था जिन्‍होंने आतंकियों को सांस लेने का एक भी मौका नहीं दिया था। लेकिन साल 2018 में सरकार ने उन्‍हें डीजीपी के पद से हटाकर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का कमिश्‍नर नियुक्‍त कर दिया था।

भगवान का शुक्रिया अदा किया

एक डेयरिंग कॉप के तौर पर जाने जाने वाले एसपी वैद्य ने अपने रिटायरमेंट को लेकर ट्वीट किया। उन्‍होंने लिखा, ‘आज मैं भारतीय पुलिस सेवा से रिटायर हो रहा हूं और मुझे गर्व है कि मेरी सेवाएं उस दिन खत्‍म हो रही हैं जब जम्‍मू कश्‍मीर में एक नए युग की शुरुआत हो रही है।’ उन्‍होंने आगे लिखा, ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे देश सेवा और इसके लोगों की सेवा के लिए चुना। जय हिंद।’ 30 अक्‍टूबर 1959 को जम्‍मू के कठुआ में जन्‍में पूर्व डीजीपी वैद्य 25 अगस्‍त 1986 बतौर आईपीएस ऑफिसर जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस में शामिल हुए थे। मद्रास वेटनेरी कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद वैद्य ने सिविल सर्विस परीक्षा पास की थी।

एक माह की बेटी पर भी आतंकियों ने किया हमला

सन् 1988 से 1990 तक बडगाम में एएसपी रहने के बाद वह इसी जिले में साल 1990 में एसपी के तौर पर नियुक्‍त हुए थे। पूर्व डीजीपी ने यूके में इंटरनेशनल कमांडर्स प्रोग्राम में भी टॉप किया था। दिसंबर 2016 में उन्‍हें जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस का डीजीपी नियुक्‍त किया गया था। सन् 1999 में वैद्य पर जम्‍मू कश्‍मीर में कई आतंकी हमले हुए। न सिर्फ उन्‍हें बल्कि आतंकियों ने उनके बॉडीगार्ड्स, उनके जवानों, उनकी पत्‍नी और यहां तक कि जब उनकी बेटी सिर्फ एक माह की थी तो उसे भी मारने की कोशिश की थी। इसके बाद भी वह आतंकियों से न तो डरे और न ही घबराकर उन्‍होंने पुलिस सर्विस को अलविदा कहने के बारे में कभी सोचा।

25 आतंकियों ने बोला कार पर धावा

मार्च 1999 को जब एक रिव्‍यू मीटिंग के बाद वह बारामूला से श्रीनगर जा रहे थे तभी 25 आतंकियों ने उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया था। उनकी बुलेट प्रूफ गाड़ी पर हैंड ग्रेनेड से हमले किए गए थे। जब कुछ नहीं हुआ तो आतंकियों ने एक मशीन गन से उनकी एंबेसडर कार पर हमला किया। इसकी वजह से उनकी गाड़ी के शीशे चकनाचूर हो गए थे। एसपी वैघ ने अपना शरीर बचाने के लिए अपना दायां हाथ आगे कर दिया और गोलियों से वह हाथ पूरी तरह से छलनी हो गया था। उन्‍हें इलाज के लिए दिल्‍ली लाया गया और उनकी सर्जरी की गई।

इस वजह से सैल्‍यूट बना खास

उनके गर्दन के पास से कुछ कोशिकाओं को लेकर हाथ में लगाया गया। डॉक्‍टरों को उम्‍मीद थी कि वह अपना हाथ ठीक से प्रयोग कर सकेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और उनकी छोटी उंगली पूरी तरह से क्षतिग्रस्‍त हो चुकी थी। इस वजह से ही जब कभी भी पूर्व डीजीपी किसी को सैल्‍यूट करते तो सिर्फ तीन उंगलियां ही नजर आतीं। दिसंबर 1999 में जिस समय कोट बलवाल जेल से एयर इंडिया की फ्लाइट आईसी-814 को आतंकियों से छुड़ाने के लिए जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी मसूद अजहर को रिहा किया गया तो वैद्य उस रिहाई का अहम हिस्‍सा थे।

300 आतंकियों के खिलाफ जेल में चलाया ऑपरेशन

29 जनवरी 2002 को उन्‍होंने श्रीनगर में उस ऑपरेशन को लीड किया था जिसमें अल बद्र संगठन के आतंकियों ने बीएसएफ के जवान को बंधक बना लिया था। इस ऑपरेशन में न सिर्फ आतंकी ढेर हुए बल्कि बीएसएफ जवान को भी सुरक्षित रिहा कराया गया। दिसंबर 2006 में जब वह जम्‍मू के आईजी थे तो उस ऑपरेशन को उन्‍होंने लीड किया जिसमें कोट भलावल जेल को सात घंटों तक चले ऑपरेशन के बाद 300 आतंकियों के कब्‍जे से छुड़ाया जा सका था।