जम्मू-कश्मीर में आरपीसी में दर्ज मामलों का ट्रायल नहीं चलेगा आईपीसी में

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केंद्र के सौ से ज्यादा कानून लागू होंगे। इसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी ) भी शामिल है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में रणबीर पेनल कोड (आरपीसी) के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं। कानून के जानकारों के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट को 31 अक्तूबर से लागू किया जा रहा है। ऐसे में आरपीसी की जगह आईपीसी लागू हो जाएगा। लेकिन 31 अक्तूबर तक दर्ज मामले चूंकि आरपीसी के तहत ही दर्ज होंगे, लिहाजा आरपीसी के तहत दर्ज होने वाले मामले आरपीसी के तहत ही चलेंगे। इसे आईपीसी में तब्दील नहीं किया जा सकता है।

हाईकोर्ट जम्मू के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट अभिनव शर्मा और एडवोकेट अंकुर शर्मा ने बताया कि कुछ अपराध हैं विशेष रूप से आरपीसी में दर्ज होते थे। इनमें जिला उपायुक्त की ओर से 188 के तहत होने वाली कार्रवाई मुख्य रूप से शामिल है। 

मौजूदा मामलों को आईपीसी में तब्दील नहीं किया जा सकता है। क्योंकि आईपीसी में केस तब्दील होने से मामलों की जांच बाधित हो सकती है। दोनों अधिवक्ताओं ने बताया कि जो भी मामले आरपीसी में दर्ज हैं या फिर 31 अक्तूबर से पहले दर्ज होंगे, उनकी जांच और कोर्ट में सुनवाई आरपीसी में ही चलेगी।