जम्मू कश्मीर में इंटरनेट बंद होने से लाइब्रेरी में बढ़ी रौनक

जम्मू कश्मीर में लगातार इंटरनेट सेवा के बंद रहने के कारण बच्चों और युवाओं को काफी मुश्किलें हो रही थीं. अब उन्होंने इसका हल ढूंढ लिया है. बच्चे और युवा अपना समय बिताने के लिए पुस्ताकलयों में पहुंच रहे हैं. पूरे कश्मीर के पुस्तकालयों में आने वाले लोगों की संख्या में काफी तेजी आ गई है, जिससे इसक व्यवस्था में जुटे लोग हैरान हैं. श्रीनगर की श्री प्रताप सिंह लाइब्रेरी में इन दिनों हर दिन सैकड़ों युवा पढ़ाई करते दिख रहे हैं. जहां पांच महीने पहले यहां इक्का-दुक्का लोग आते थे, वहीं इंटरनेट बंद होने के बाद यहां भीड़ बढ़ गई है. दरअसल, 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया. सुरक्षा कारणों से जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर परितबंध लगा दिया गया है जो अब भी जारी है.

छात्रों का कहना है कि लाइब्रेरी उन्हें प्रतियोगी परीक्षा, रिसर्च और अन्य शिक्षा से जुड़े मुद्दों में जानकारी जुटाने में मददगार साबित हो रहे हैं. इन दिनों पुस्तकालय में एक महीने में लगभग 200 फॉर्म प्राप्त किए जा रहे हैं. इस वजह से यहां कार्यरत अधिकारियों को स्थान बढ़ाने और अतिरिक्त टेबल कुर्सियों का इंतजाम करना पड़ रहा है. इंटरनेट बंद होने के कारण छात्र पुस्तकों और समय-समय पर ऑनलाइन खरीदारी करने में भी मुश्किल हो रही है, जिसके लिए वे कश्मीर के पुस्तकालयों से संपर्क कर रहे हैं.

एमएसी कर रहे राहिल कहता हैं, ‘लाइब्रेरी में उपस्थिति बढ़ गई है. इंटरनेट बंद होने के बाद यह बदलाव आया है. इंटरनेट ज़रूरी है, लेकिन उसके बंद होने से छात्र वापस पुस्तकों पर लौटे हैं.’

यूपीएससी की तैयारी कर रहे एहसान-उल-हक, कहते हैं, ‘यहां आने का मकसद बिलकुल अलग है. मुझे लगता है लोग लाइब्रेरी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. लाइब्रेरी आने फायदा यह है कि यहां पढ़ने का अलग माहौल मिलता है.’ औज़ेर कहते हैं, ‘इंटरनेट बंद होने से लाइब्रेरी में हाजिरी बढ़ेंगी.’

लाइब्रेरी के असिस्टेंट निदेशक जाहिदा बानो ने कहा, ‘जब से इंटरनेट बंद हुआ है तब से ज्यादा लोग आने लगे हैं. हमने हर प्रतियोगी परीक्षा के लिए सुविधा जुटाने की कोशिश की है.’ कश्मीर में पड़ रही कड़ाके की सर्दी का भी ख्याल रखा गया है. ज्यादातर लाइ्ब्रेरी को अंदर से गर्म रखने की सुविधा की गई है.