जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जल्द मिलेगी 300 एंबुलेंस, शुरू होगी 102-108 सेवा

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ नवंबर में वहां के लोगों को 102-108 नंबर की एंबुलेंस सेवा का तोहफा देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए 300 एंबुलेंस पर जीपीएस लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। लद्दाख के लिए चार अत्याधुनिक एंबुलेंस भेजी गई हैं। जम्मू वर्कशाप में करीब 40 एंबुलेंस पर भी काम किया जा रहा है। नवंबर में दोनों नंबरों की एंबुलेंस सेवा शुरू होने से राज्य के लोगों को राहत मिलेगी। एंबुलेंस पर जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) लगाने का उद्देश्य उनकी तत्काल लोकेशन का पता लगाकर मरीज या घायल तक निकटतम केंद्र से एंबुलेंस सेवा मुहैया करवाना है। इसमें घायल या मरीज खुद उक्त नंबरों पर सीधे संपर्क करके एंबुलेंस सेवा पा सकेगा।

मरीजों को जीपीएस आधारित एंबुलेंस के अलावा 50 एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) और 66 बेसिक लाइफ स्पोर्ट (बीएलएस) एंबुलेंस भी उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए आधी से ज्यादा एंबुलेंस को तैयार कर लिया गया है। ये एंबुलेंस सेवा रोगियों को तत्काल चिकित्सा देखभाल, विशेष रूप से महत्वपूर्ण, ट्रामा, आकस्मिक पीड़ितों, गर्भवती महिलाओं और बीमार बच्चों के लिए परिवहन प्रदान करेगी। 

राज्य के दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में कीमती जिंदगियों को बचाने में यह एंबुलेंस सेवा वरदान साबित होगी। नेशनल हेल्थ मिशन जेएंडके के मिशन निदेशक भूपेंद्र कुमार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एंबुलेंस सेवा को शुरू करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। 

इस एंबुलेंस सेवा के लिए भारत विकास ग्रुप, इंडिया लिमिटेड के साथ मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) से समझौता किया गया है। इस एंबुलेंस सेवा को सुचारु रूप से चलाने के लिए 40 सीटर काल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसमें 125 इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन उपलब्ध रहेंगे। एएलएस और बीएलएस के लिए करीब 300 चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  प्रदेश में वर्ष 2014 से 2018 तक 102 एंबुलेंस सेवा करीब साढ़े तीन साल तक बहाल रही। लेकिन फरवरी 2018 में संबंधित कंपनी से समझौता खत्म होने पर इस एंबुलेंस सेवा को बंद कर दिया गया।