उत्तर कश्मीर का एक गांव 28 सालों से पुल ना होने के कारण बदहाली का जीवन बसर कर रहा है

उत्तर कश्मीर के बारामूला ज़िले के पट्टन में बसे दरगाम गांव में लोग पिछले तीन दशकों से एक पुल की मांग कर रहे है. लेकिन डिजिटल इंडिया के इस दौर अब तक यह बेसिक मांग पूरी नहीं हुई है. पुल का ना होना केवल मुश्किल ही नहीं बल्कि इनके लिए हर दिन एक जोखिम बना रहता है. सर्दियां शुरू होते ही ना सिर्फ इस नदी का पानी का स्तर बढ़ जाता है, बल्कि बेहद ठंडा हो जाता है. पानी का बहाव इतना तेज़ होता है कि लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर नदी पार करनी पड़ती है. क्या महिलाएं क्या बुज़ुर्ग, क्या स्कूली बच्चे, सबको इस नदी को पार कर जाना पड़ता है.

लोगों का आरोप है कि इन्होंने हर दरवाज़ा खटखटया मगर कोई मदद नहीं मिली. विधायक से लेकर जिला प्रशासन तक इनकी फरियाद अनसुनी रही. गांव के एक बुज़र्ग अली मोहम्मद वाणी कहते है “हमें यहां एक पुल तामीर करना है 70 सालों से मांग कर रहे हैं. हम बहुत तकलीफ से गुज़र रहे है. हम अब राज्यपाल जी से गुज़ारिश करते है की हमारी यह मुश्किल दूर करें”.

इस गांव की आबादी करीब 6 हज़ार के आस पास है. पुल ना होने की वजह से यह गांव दशकों से ज़िले के बाकि हिसों से कटा रहता है. मरीजों को कंधे पर उठाकर इसी नदी को पार कर अस्पताल तक ले जाना पड़ता है. थोड़ी से बारिश हुई नहीं की बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है. अब यह लोग उम्मीद है कि शायद राज्यपाल उनको इस मुसीबत से छुटकारा दिला दे.

गांव की एक महिला हमीदा बानो कहती है ” हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते है जब नदी में बाढ़ आती है”. मोहमद अयूब कहते है ” हम गुज़ारिश करते हैं सरकार से, राज्यपाल से कि यहां पुल बनाया जाए. स्टूडेंट्स को बहुत मुश्किल होती है. 15 मिनट का रास्ता 15 किलोमीटर में तय होता है, ना सड़क है और ना पुल”.

पूरे भारत देश की तस्वीर बदल चुकी है मगर इन गांव वालों के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ. वह कहते हैं कि आज तक जितने चुनाव हुए उनमें हर बार हमने इसी वादे पर वोट दिया की यहां पुल तामीर होगा मगर कोई वादा पूरा नहीं हुआ.