जम्मू-कश्मीर के किसानों की लड़ाई लड़ेगी एआईकेएससीसी, 29 को दिल्ली पहुंचेंगे कश्मीरी किसान

सरकार की तरफ से लागू की गई पाबंदियों और असमय बर्फबारी ने जम्मू-कश्मीर में सेब, केसर और नाशपाती की 70 फीसदी फसल बरबाद कर दी है। नतीजतन पहले से ही केंद्रीय नीतियों से नाराज इस नवगठित केंद्र शासित प्रदेश के किसान बदहाली के कगार पर पहुंच गए हैं।यह दावा जम्मू-कश्मीर के तीन दिन के दौरे से लौटने के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति (एआईकेएससीसी) के सात सदस्यीय दल ने किया है। एआईकेएससीसी ने जम्मू-कश्मीर के किसानों को सरकार से मदद दिलाने की लड़ाई लड़ने का भी एलान किया है।

शनिवार को एआईकेएससीसी के पदाधिकारी वीएम सिंह, योगेंद्र यादव, राजू शेट्टी और कृष्ण प्रसाद आदि ने पत्रकारों को बताया कि उनके दल ने गांदरबल, पांपोर, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग के किसानों से मुलाकात करते हुए उनकी समस्याओं को साझा करने की कोशिश की।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के खात्मे के बाद छह अगस्त से लागू हुई बंदी, कम्युनिकेशन सुविधाओं पर प्रतिबंध और परिवहन की समस्याओं के चलते वहां के किसान अपनी फसल को समय पर मंडी तक नहीं पहुंचा सके। बाकी कसर सात नवंबर को हुई भारी बर्फबारी ने पूरी कर दी, जिसमें 18 इंच से 1 मीटर तक गिरी बर्फ ने किसानों द्वारा 15-20 साल मेहनत कर तैयार किए गए सेब के पेड़ों को बीच में से फाड़ दिया। बागबानी विभाग ने महज 37 फीसदी फसल के नुकसान का ही आकलन किया है।