केंद्र का अधिवास कानून जम्मू कश्मीर के लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कवायद : जेकेएपी प्रमुख

‘जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी’ (जेकेएपी) के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने आरोप लगाया है कि केंद्र शासित प्रदेश में अधिवास कानून पर बुधवार को जारी केंद्र का आदेश पूर्ववर्ती राज्य के लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कवायद के अलावा और कुछ नहीं है। बुखारी ने कहा कि यह संसद द्वारा बनाया गया कानून नहीं है बल्कि सरकार द्वारा जारी आदेश है इसलिए जम्मू कश्मीर के लिए अधिवास कानून के संबंध में नयी राजपत्रित अधिसूचना को न्यायिक समीक्षा से छूट नहीं है।उन्होंने कहा ‘‘एक ओर जहां जेकेएपी जम्मू कश्मीर के लोगों को जमीन और नौकरी के अधिकार के लिए मांग करती रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश इस बात का परिचायक है कि यह राज्य के लोगों की महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखे बिना, नौकरशाही के स्तर पर किया गया आकस्मिक फैसला है।’’ गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को जम्मू कश्मीर के 138 कानूनों में विभिन्न संशोधनों के लिए एक राजपत्रित अधिसूचना जारी की। इसमें चतुर्थ श्रेणी (पुलिस बल में कॉन्स्टेबल के रैंक के समकक्ष) तक की नौकरियों में केवल उन लोगों की ही भर्ती करना शामिल है जो केंद्र शासित प्रदेश में अधिवास करते हैं। सरकार ने अधिवास श्रेणी के तहत एक उपबंध किया है जिसके तहत किसी व्यक्ति को 15 साल की अवधि तक जम्मू कश्मीर में रहना होगा। दस साल तक यहां अपनी सेवाएं देने वाले अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के बच्चे भी इस श्रेणी में आएंगे। अधिसूचना में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर लोक सेवाएं (विकेंद्रीकरण एवं भर्ती) कानून को भी संशोधित किया गया है। बुखारी ने कहा ‘‘जो आदेश जारी किया गया है वह जेकेएपी को पूरी तरह अस्वीकार्य है। रोजगार के मामले में – पेशेवर कालेजों में प्रवेश और सेवाओं में गैर राजपत्रित, राजपत्रित पद के संदर्भ में एक जटिल कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी ताकि जम्मू और कश्मीर के उन लोगों के अधिकारों की रक्षा होती जो जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासी हैं।’’ बुखारी ने यह भी मांग की कि जब तक देश कोरोना वायरस के खतरे से उबर नहीं जाता तब तक इस आदेश पर अमल न किया जाए।