ISI की नई साजिश, टेरर फंडिंग के लिए PAK दे रहा कश्मीरी छात्रों को कॉलेज में दाखिले: सूत्र

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में टेरर फंडिंग (Terror Funding) पर बड़ा खुलासा हुआ है. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान (Pakistan) की आईएसआई ने कश्मीर में मौजूद आतंकी गुटों को फंडिंग की नई प्लानिंग तैयार की है. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर में मौजूद अलगाववादी गुटों की मदद से आईएसआई कश्मीर में सक्रिय आतंकी गुटों को फंडिंग कर रही है. पाकिस्तान बड़ी संख्या में कश्मीरी छात्रों को पाकिस्तान और पीओके के कॉलेजों में दाखिला दे रहा है. पाक के कॉलेजों में उन्हीं कश्मीरी छात्रों को दाखिला मिलता है जिनके पास अलगावादियों के सिफारिशी पत्र होते हैं. अलगवादी पाक जाने वाले कश्मीरी छात्रों को इन शिफारशी पत्रों के बदले मोटी रकम लेते हैं जिनमें से एक बड़ा हिस्सा आतंकियों के पास भेजा जा रहा है. Zee News को मिली एक्सलूसिव जानकारी के मुताबिक जब से जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया है, करीब एक हजार कश्मीरी छात्रों को पाकिस्तान के अलग-अलग कॉलेजों में दाखिला दिया जा चुका है.

केंद्रीय सुरक्षा में तैनात एक अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान के कॉलेजों में एडमिशन के लिए घाटी के छात्रों को अलगावादियों और उनसे जुड़े संगठनों को पैसा देना होता है, तभी जाकर उन्हें सिफारिशी पत्र मिलता है. इन सिफारिशी पत्र को दिल्ली के पाक हाई कमीशन जमा करना होता है. उसके बाद ही पाक जाने वाले छात्रों को पाकिस्तान में दाखिला मिलता है. देखा जाए तो पाकिस्तान कश्मीर में मौजूद आतंकियों और अलगावादियों को अब तक हवाला और ट्रेड रूट के जरिये होने वाली मदद करता रहा है लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच के बाद से भारतीय जांच एजेंसियों की कड़ी निगरानी से बचने के लिए आईएसआई ने टेरर फंडिंग की ये नई प्लानिंग तैयार की है.

कश्मीर से पाकिस्तान जाने वाले छात्रों में मेडिकल की पढ़ाई करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है. हर साल करीब 200-250 छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने पाक जाते हैं. इन छात्रों को लाहौर, इस्लामाबाद और कराची के अलग-अलग कॉलेजों में एडमिशन दिया जाता है. इसी तरह से कंप्यूटर, जनर्लिजम और इंजीनियरिंग जैसे कोर्सज में बड़ी संख्या में कश्मीरी छात्रों को पाक के कॉलेजों में दाखिला दिया जाता है.

आईएसआई ने कोर्सेस के लिए अलग-अलग रेट तय किए
अलगावादियों के पैरवी वाले लेटर के लिए आईएसआई ने कोर्सेस के लिए अलग-अलग रेट तय किए हुए हैं. पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए अलगावादी 25-30 लाख की कीमत वसूलते हैं, वहीं इंजीनियरिंग के कोर्सज में दाखिले के लिए अलगावादी सिफारिशी पत्र के बदले 10 लाख रुपये तक वसूलते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल इन सिफारिशी पत्र के बदले 15 करोड़ रुपये की उगाही करते हैं. आईएसआई ने सैय्यद अली शाह गिलानी,मीरवाइज़,उमर फारुक और शब्बीर शाह समेत कई अलगावादियों को इन पैसों की उगाही की जिम्मेदारी दी हुई है.

पाकिस्तान पढ़ने गए इन कश्मीरी छात्रों का ब्रेनवॉश कर इन्हें भारत के खिलाफ भड़काया जाता है जिससे कश्मीर में अमन चैन की भारत सरकार की कोशिशों को नाकाम किया जा सके. कई छात्रों को भारत के खिलाफ जासूसी के लिए तैयार किया जाता है. कुछ छात्रों को जम्मू कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों की तरफ से मानवअधिकार हनन और भारत के मुसलमानों पर अत्याचार से जुड़े फर्जी स्टोरी को प्रचारित और प्रसारित करने को कहा जाता है.

हथियार चलाने की दी जाती है ट्रेनिंग
इनमें से कुछ कश्मीरी छात्रों को पाक के टेरर कैंपों में भी शामिल किया जाता है जिन्हें इस दौरान हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें भारतीय सेना की जासूसी के भी तरीके सिखाए जाते हैं. पाकिस्तान इस कोशिश में है कि ज्यादा से ज्यादा कश्मीरी छात्रों को पाक के कॉलेजों में दाखिला दिया जाए. पाकिस्तान ने अपने कई कॉलेजों में भारत से आए कश्मीरियों के लिए कुछ सीटे रिजर्व रखी हुई हैं. पाकिस्तान इसके जरिये कश्मीरी युवाओं पर अपनी पकड़ को मजबूत रखना चाहता है. हालांकि पाकिस्तान की इन डिग्रियों को भारत में मान्यता नहीं है लेकिन इन सबके बावजूद छात्र पाकिस्तान की चाल में फंस रहे हैं.