जमात-ए-इस्लामी सदस्यों को जोधपुर व जम्मू की जेलों में शिफ्ट करने की तैयारी में जुटी सरकार

केंद्र सरकार की ओर से जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध के बाद पूरी रियासत में जमात से जुड़े नेता और सदस्य भूमिगत हो गए हैं। जमात के सदस्य भूमिगत होकर अपनी गतिविधियों को संचालित करने में जुटे हुए हैं। इस सूचना के बाद सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। सभी जिलों में इनके सदस्यों तथा उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जमात के पकड़े गए सदस्यों को घाटी के बाहर जम्मू तथा जोधपुर जेल भेजे जाने की योजना है।

सूत्रों ने बताया कि घाटी की जेलों में जमात के सदस्यों को मोबाइल तथा अन्य प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हो जाने के शक में यह तय किया गया है कि इन्हें घाटी से बाहर भेजा जाए। कुछ प्रमुख नेताओं को जोधपुर की जेल में भेजा जाएगा। अन्य को जम्मू व कठुआ की जेलों में रखा जाएगा। सूत्र बताते हैं कि मौसम के चलते हाईवे के बार-बार बंद होने के कारण इनकी शिफ्टिंग नहीं हो पा रही है। जैसे ही हाईवे पूरी तरह खुल जाएगा इन्हें शिफ्ट कर दिया जाएगा।

घाटी के साथ ही जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह, जम्मू, राजोरी, पुंछ में भी जमात के सदस्य सक्रिय बताए जाते हैं। अब तक 300 से अधिक जमात सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। सरकार की ओर से इनकी संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार पूरी रियासत में इनकी चार हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति हो सकती है।

इनमें नेताओं के आलीशान बंगले, स्कूल, मदरसे, मस्जिद सभी कुछ शामिल हैं। लगभग सभी स्थानों से जमात के बोर्ड हट गए हैं। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम, पुलवामा, शोपियां, अनंतनाग सहित ज्यादातर जिला कार्यालयों को प्रशासन ने सील कर दिया है। कई नेताओं के मकानों पर भी ताला चढ़ाया गया है।

कश्मीर घाटी आधारित पार्टियां नेकां तथा पीडीपी की ओर से जमात की ओर से संचालित स्कूलों तथा मस्जिदों को बंद किए जाने पर शोर मचाने पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमात की ओर से संचालित स्कूलों, मस्जिदों तथा अनाथालयों पर किसी प्रकार की पाबंदी नहीं है। बहरहाल, पुलिस की ओर से जमात सदस्यों की गिरफ्तारी के संबंध में कुछ भी जानकारी देने से इनकार किया जा रहा है।