केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे पर जम्मू के ज्यादातर लोग खुश, कुछ नाराज

जम्मू-कश्मीर राज्य औपचारिक तौर पर बृहस्पतिवार को दो केंद्रशासित क्षेत्रों में बंट गया। जम्मू क्षेत्र के लोगों ने इस बदलाव का व्यापक स्तर पर स्वागत किया और उनमें से कुछ ने यहां तक कहा कि यह ‘‘भेदभाव के युग का अंत’’ है। हालांकि कुछ लोगों ने राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने का विरोध भी किया और कहा कि राज्य से अब यह प्रदेश केंद्रशासित क्षेत्र में बदल गया। जेकेएनपीपी कार्यकर्ताओं ने अपने अध्यक्ष और पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह के नेतृत्व में एग्जिबिशन ग्राउंड में रैली की। जम्मू क्षेत्र में ज्यादातर लोगों के लिए यह भावनात्मक क्षण है। उनका कहना है कि इसके साथ ही कश्मीर केंद्रित शासन का अंत हो गया, भले ही राज्य का दर्जा खत्म होकर केंद्रशासित क्षेत्र रह गया हो। जम्मू के तालाब टिल्लू, डोगरा हॉल, त्रिकुट नगर, मुथी, जानीपुर और शहर के कई पुराने क्षेत्रों में लोगों ने पटाखे जलाए और ढोल बजाए। जम्मू विश्वविद्यालय के छात्र विकास शर्मा ने कहा, ‘‘हम जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्रशासित क्षेत्र में पुनर्गठित करने से बेहद खुश हैं। हालांकि हम अलग जम्मू राज्य चाहते थे लेकिन फिर भी हम केंद्रशासित क्षेत्र पाकर खुश हैं। इसके साथ ही कश्मीर केंद्रित शासकों द्वारा किए गए भेदभाव का युग खत्म होगा।’’ उनकी तरह ही पूर्व सैनिक प्रताप सिंह जामवाल ने कहा कि भले ही राज्य का दर्जा छीन गया है लेकिन फिर भी वह खुश हैं। उन्होंने आशा जताई कि इससे जम्मू के मुकाबले कश्मीर को प्राथमिकता देने का शासन खत्म होगा। वहीं, पेशे से चालक कुलदीप कुमार का कहना है कि जम्मू के लिए यह उत्सव का समय है क्योंकि इससे जम्मू का तेजी से विकास होगा। हालांकि इस फैसले से सभी बेहद खुश नहीं हैं। एग्जिबिशन ग्राउंड में प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा छीनने को ‘ अधिनयाकवादी’ करार दिया। यहां ‘तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘ हिटलर राज नहीं चलेगा’, ‘ राज्य का दर्जा बहाल करो’ जैसे नारे लग रहे थे। जेकेएनपीपी के हर्ष देव सिंह ने 31 अक्टूबर को ‘काला दिवस’ बताया। उनका कहना है कि 200 साल पुराने डोगरा राज्य को केंद्रशासित क्षेत्र में बदल दिया गया। यह फैसला महाराजा हरि सिंह का अपमान है।