ऑपरेशन ऑल आउट: कश्मीर में मार्च 2017 से अब तक 25 कमांडर सहित 500 आतंकी ढेर

कश्मीर घाटी में कई माह से लगातार आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में तेजी देखने को मिली है। इससे साफ लगता है कि सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद का घाटी से सफाया करने की ठान ली है, लेकिन साथ ही उनका यह भी मानना है कि घाटी में आतंकवाद तब तक जिंदा है जब तक पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ पूरी तरह से नहीं रुकती।

एक सुरक्षा अधिकारी के अनुसार अगर सुरक्षा एजेंसियां घाटी में एक-एक स्थानीय आतंकी को चुन चुनकर मारती हैं, तब भी यहां आतंकवाद का सफाया नहीं होगा। उन्होंने बताया कि आतंकवाद का सफाया पूरी तरह से तभी होगा जब पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी भेजना बंद करेगा। अधिकारी के अनुसार हालांकि इस वर्ष अक्तूबर से आतंकवाद में नई भर्ती में कमी हुई है।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल नवंबर में करीब 40 आतंकी मार गिराए हैं, जिनमें हिजबुल और लश्कर के 8 टॉप कमांडर भी शामिल हैं। जबकि इस वर्ष अभी तक पिछले वर्ष से इस समय तक मारे गए 207 आतंकियों के मुकाबले 230 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया है।

चौंका देने वाली बात यह है कि अभी भी सक्रिय आतंकियों का आंकड़ा 250 के आसपास है। 230 का मारा जाना और 250 का अभी भी सक्रिय होना यह साबित करता है कि कुल 500 के करीब आतंकी सक्रिय थे।

इस बीच जनवरी 2018 से अब तक 230 के करीब आतंकियों का मारा जाना एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घाटी में सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद का सफाया करने के पथ पर चल रही हैं और लगातार उनके हाथ कामयाबियां लग रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां आए दिन आतंकियों का सफाया कर रही हैं चाहे वो स्थानीय हो या विदेशी।

इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा नहीं है कि 230 आतंकी मारे गए और अब केवल 50 या 60 रह गए हैं, बल्कि सच तो यह है कि आतंकियों का नंबर ऊपर नीचे होता रहता है। उन्होंने सीधे तौर पर नहीं हालांकि उस ओर भी इशारा किया कि हाल ही में नई भर्ती नहीं हुई है, लेकिन कई आतंकी घुसपैठ कर दाखिल होने में सफल हुए हैं क्योंकि एलओसी पर पूरी तरह पहरा देना मुश्किल है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस साल आतंकवाद को बड़ा झटका लगा है और वर्ष 2007 से पहली बार हुआ है कि इतने आतंकी मारे जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार मार्च 2017 से अभी तक करीब 500 आतंकी मारे जा चुके हैं जिनमें 25 टॉप कमांडर शामिल हैं।