पत्नी को सलामत होने की सूचना देने को हर रोज एटीएम से 100 रुपये निकालता था कश्मीर में तैनात जवान

अनुच्छेद 370 के अंत के बाद कश्मीर घाटी में प्रभावित टेलिकॉम सेवाओं के कारण कई जवानों को अपनों से बात करने में असुविधा का सामना करना पड़ा था। इन परिस्थितियों में कश्मीर घाटी में तैनात पैरामिलिट्री फोर्स के जवान राकेश कुमार (बदला हुआ नाम) ने अपने परिवार को एसएमएस भेजने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला।
हालांकि कश्मीर घाटी में पांच अगस्त से एसएमएस, इंटरनेट सेवा का बंद रहना बदस्तूर जारी है। कश्मीर के तमाम इलाकों में जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है, हालांकि कुछ संवेदनशील हिस्सों में पाबंदियां अब भी बरकरार हैं।
अनुच्छेद 370 के अंत के बाद कश्मीर में उपजे हालात के बीच इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद की गईं। इस बीच जवान राकेश हर रोज एटीएम में पैसे निकालने जाते रहे। जिसने सुरक्षा गार्ड को उनके इस नियमित व्यवहार के बारे में जानने के लिए उत्सुक कर दिया। इसी बीच बैंक के गार्ड ने आखिरकार साहस कर राकेश से पूछ लिया कि वह प्रत्येक दिन 100 रुपये क्यों निकालते हैं, जबकि वह एक बार में 3,000 रुपये निकाल सकते हैं और खुद को रोजाना एटीएम जाने की परेशानी से बचा सकते हैं। राकेश मुस्कुराए और एटीएम गार्ड से विनम्रता से कहा, ‘यह मेरा पत्नी के साथ दिन के समय बात करने का तरीका है।’

अकाउंट में पत्नी का नंबर है दर्ज
राकेश के जवाब पर हैरान गार्ड ने पूछा, ‘आप वह कैसे करते हैं?’ राकेश ने कहा, ‘मेरे बैंक खाते में रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंबर का उपयोग मेरी पत्नी करती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हर बार जब मैं अपने बैंक खाते से पैसे निकालता हूं तो मेरी पत्नी को उसके फोन पर पैसे निकालने का संदेश मिलता है। इस तरह से उसे पता चलता है कि मैं ठीक और सुरक्षित हूं।’

100 दिन से घाटी में बंद हैं टेलिकॉम सर्विसेज
बता दें कि कश्मीर में बीते 100 दिन से अधिक समय से इंटरनेट और अन्य टेलिकॉम सेवाएं बंद हैं। घाटी में रहने वाले आम लोग और व्यापारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि यहां पर टेलिकॉम सर्विसेज को पूरी तरह से बहाल किया जाए। स्थानीय लोगों का तर्क है कि अधिकारियों द्वारा यह दावा करने के बावजूद कि घाटी में हालात सामान्य हैं, दोनों सेवाओं को बंद रखने से उनकी आजीविका बर्बाद हो गई है।