कश्मीर में निजी निर्माण कार्य जोरों पर

कश्मीर में निजी भवन निर्माण कार्य पूरे जोरों पर है लेकिन अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के बाद गैर स्थानीय मजदूरों के यहां से चले जाने के चलते निर्माण सामग्रियों की कीमत बढ़ गई है। कश्मीर में उद्योग से जुड़ी लोगों ने यह जानकारी दी। दिहाड़ी मजदूरों के मेहनताने में बढ़ोतरी के अलावा ईंट, रेत, पत्थर और सीमेंट की कीमतों में भी 15 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। निजी निर्माण के एक ठेकेदार मंजूर अहमद ने पीटीआई-भाषा को बताया, “पांच अगस्त को कश्मीर में बंद से पहले, मैंने प्रति ट्रक 18,000 रुपये की कीमत पर ईंटें खरीदीं। अब इसी के लिए मुझे 22,500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कीमतों में यह इजाफा ईंट के भट्ठे में काम करने वाले मजदूरों की कमी की वजह से हुआ है, जो जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने से पहले सरकार की तरफ से जारी परमार्श के मद्देनजर घाटी छोड़ कर चले गए थे। शहर के हैदरपोरा इलाके में एक घर का निर्माण कर रहे एजाज अहमद दार ने कहा कि लोहे को छोड़ कर भवन निर्माण कार्य की सभी वस्तुओं की कीमत पिछले तीन महीने में बढ़ गई है। उन्होंने कहा, “बंद से पहले रेत के एक ट्रक के लिए 6,500 रुपये कीमत देनी पड़ रही थी लेकिन अब इसी की कीमत 8,000 रुपये पड़ रही है। घर की नींव में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों के साथ भी यही बात है। जून-जुलाई में पत्थरों का एक ट्रक 3,200 रुपये में पड़ता था जो अब 4,000 से 5,000 के बीच पड़ रहा है।” मौजूदा हालात में स्थानीय सीमेंट फैक्टरियों के काम नहीं करने की वजह से घाटी से बाहर से लाया जा रहा सीमेंट ही फिलहाल बाजार में उपलब्ध है।