जम्मू-कश्मीर: सरपंच अनिल पंडिता की हत्या का मामला सुलझा, आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का था हाथ

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में हुई कश्मीरी पंडित सरपंच अनिल पंडिता की हत्या का मामला सुलझाने का दावा किया है. कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार के अनुसार इस हत्या के पीछे आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का हाथ था. हत्या में शामिल आतंकी को उसके साथी समेत मार गिराया गया है.

पुलिस के अनुसार दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में सोमवार, 8 जून को अज्ञात आतंकियों ने अनंतनाग के लार्किपोरा में 42 साल के अनिल रैना की गोली मार कर हत्या कर दी थी. इसके बाद हुई झांच में पुलिस को कुछ चस्मदीद के ज़रिये एक आतंकी के बारे में जानकारी मिली. इस आतंकी कि पहचान उमर हस्सन भट्ट के तौर पर हुई. उमर का ताल्लुक हिजबुल मुजाहिदीन के साथ था और 13 जून को निपोरा काजीगुंड में हुई मुठभेड़ में अपने एक और साथी जावेद भट्ट के साथ मारा गया. उसके कब्ज़े से एक पिस्तौल भी मिली है जिसको फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.

आईजी कश्मीर के अनुसार अभी इस पिस्तौल की बैलिस्टिक रिपोर्ट के आने के बाद पूरे मामले में चालान पेश किया जाएगा. उनको पक्का यकीन है कि इस हत्याकांड में इसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था. अनिल कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए थे और अनंतनाग के लार्किपोरा के लोकभावन पंचायत हलके के सरपंच थे.

महिला सरपंच के अपहरण के बाद डर का माहौल

इस हत्या के बाद घाटी के सरपंचों में डर फैल गया था. जो सोपोर में एक महिला सरपंच के अपहरण के बाद और बढ़ गया था. पुलिस ने अपहरण की पुष्टि करते हुए कहा कि महिला के अपहरण और धमकी के पीछे लश्कर के आतंकी वलीद और उसके एक लोकल साथी का हाथ था और इस का मकसद पंचो और सरपंचो में डर फैलाना था. आईजी कश्मीर के अनुसार ऐसे सभी पंच और सरपंच जिन को आतंकियों का खतरा है तुरंत पुलिस के साथ संपर्क करके सुरक्षा ले सकते हैं.

कश्मीर घाटी में पिछले 10 सालों में बीस से जायदा पंचो और सरपंचो की हत्या हुई है. लेकिन पिछले साल हुए चुनावों के बाद चुने गए करीब 30 हज़ार से ज्यादा पंचो और सरपंचो को सुरक्षा देने में पुलिस ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार पंचों और सरपंचो के लिए हर जिले में विशेष सुरक्षित आवास पर्याप्त मात्रा में हैं. जहां वह सुरक्षा के साथ रह सकते हैं. जिन सरपंचो और पंचो कि सुरक्षा में खतरे का आंकलन होता है उनको सुरक्षा प्रदान की जाती रही है. लेकिन सभी 30 हज़ार पंच सरपंच को सुरक्षा देना संभव नहीं.

पंचो और सरपंचो ने सुरक्षा की मांग की

लेकिन इस नए हत्याकांड के बाद कश्मीर घाटी में गंदेरबल, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, बड़गाम और श्रीनगर के भी कई पंचो और सरपंचो ने सुरक्षा की मांग की है. इन सभी का कहना है कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में आतंकियों का सफाया होने की कीमत इनको चुकानी पड़ेगी.