केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा- वह दिन दूर नहीं जब POK में फहराया जाएगा तिरंगा

केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह (Jitendra Singh) ने बृहस्पतिवार को पीओके को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में तिरंगा फहराना संभव होगा। सिंह ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में चेनानी- नाशरी सुरंग का नाम बदलने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra modi) के नेतृत्व में नये भारत का कारवां आगे बढ़ रहा है और वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में तिरंगा फहराया जाएगा जिसके लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया था।

सिंह (Jitendra Singh) ने कहा कि नरेन्द्र मोदी (PM Narendra modi) ने 2017 में नौ किलोमीटर लंबी सुरंग को राष्ट्र को सर्मिपत किया था जिससे जम्मू और श्रीनगर के बीच दूरी में 31 किलोमीटर की कमी आई लेकिन ‘‘किन्हीं मजबूरियों’’ के कारण इसका नाम मुखर्जी के नाम पर नहीं रखा जा सका था। इतना ही नहीं उन्होंने सुरंग का नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने का प्रस्ताव स्वीकार करने का श्रेय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को दिया।

सिंह ने कहा कि 66 वर्ष पहले 11 मई 1953 को मुखर्जी को बिना प्राथमिकी, आरोपपत्र या चेतावनी दिए अवैध रूप से लखनपुर से गिरफ्तार किया गया था और उन्हें चेनानी- नाशरी मार्ग से श्रीनगर ले जाया गया था। मुखर्जी की 23 जून 1953 को मृत्यु के बाद उनकी मां ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखकर उनकी मौत की जांच करने की मांग की थी। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ कारणों से तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने उस पत्र पर ध्यान नहीं दिया और कोई जांच नहीं की गई। अब नया जमाना है। तब नेहरू की सरकार थी, अब मोदी की सरकार है उस जांच या खामी को पाटा जा सकता है लेकिन यह यादगारी भावी पीढ़ी के लिए उनकी विरासत एवं याद को संजोकर रखेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘नेहरू सरकार की खामियों को मोदी सरकार ने दुरूस्त कर दिया है। अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को रद्द करने के करीब दो महीने बाद सुरंग का नाम बदलने का निर्णय किया गया है। ‘चेनानी- नाशरी सुरंग’ का निर्माण 2600 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। यह सुरंग बर्फ से आच्छादित ऊपरी इलाकों से अलग होकर गुजरती है जिससे यात्रा की अवधि दो घंटे कम हो जाती है और जम्मू से उधमपुर, रामबन, बनिहाल और श्रीनगर यात्रा करने वाले हर समय सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं।